Vastu-shastra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c85: Bibliography
Vāstu-śāstra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c85
- Language
- English
Bibliography
v2.c85.1
Enough has been said about the important works consulted. They are all inferred invariably at their proper places. More important ones have been specially indicated in the Introduction, more particularly in the respective introductories of all the five parts. Here therefore only the works forming the sources are being mentioned with their abbreviations. Iconography being a very vast subject, practically all the source-literature—Samhitās, Brāhmaṇas, Upniṣads, Epics, outstanding works of eminent Sanskrit poets like Kālidāsa, Bāṇabhaṭṭa Śrīharṣa etc. etc. have also found a prominent place in this exposition.
v2.c85.2
मौलिक-ग्रन्थाः तेषां संक्षेपाङ्कानि च
v2.c85.3
अ. प्रतिमा-विज्ञाने प्रतिमा-लक्षणे च
v2.c85.4
आगमेषु —
v2.c85.5
| १. अंशुमद्भेदागमः | अं० आ० |
| २. उत्तरकामिकागमः | उ० कामि० |
| ३. कामिकागमः | का० आ० |
| ४. कारणागमः | कार० आ० |
| ५. पूर्वकारणागमः | पू० कार० |
| ६. वैखानसागमः | वै० आ० |
| ७. सुप्रभेदागमः | सु० आ० |
| ८. मकुटागमः | मु० आ० |
| ६. कुमारतन्त्रागमः | कु० त० |
v2.c85.6
पुराणेषु —
v2.c85.7
| १. अग्निपुराणम् | अ० पु० |
| २. आदित्य-पुराणम् | आ० पु० |
| ३. पद्मपुराणम् | प० पु० |
| ४. मत्स्य-पुराणम् | म० पु० |
| ५. मार्कण्डेयपुराणम् | मा० पु० |
| ६. देवीपुराणम् | दे० पु० |
| ७ विष्णुधर्मोत्तरम् | वि० ध० |
| ८. ब्रह्माण्डपुराणम् | ब्र० पु० |
| ६. स्कन्दपुराणम् | स्क० पु० |
| १०. भविष्यत्पुराणम् | भ० पु० |
v2.c85.8
शिल्प-ग्रन्थेषु —
v2.c85.9
| १. विश्वकर्मशास्त्रम् | विश्व० |
| २. मयमतम् | मय० |
| ३. मानसार-शिल्पशास्त्रम् | मान० |
| ४. समराङ्गण-सूत्रधार-वास्तु-शास्त्रम् | स० सू० |
| ५. अपराजितपृच्छा | अ० पृ० |
| ६. रूपमण्डनम् | रूप० |
| ७. शिल्परत्नम् | शिल्प० |
| ८. शिल्परत्नसंयोजितम् | शि० संयो० |
| ६. मयदीपिका | म० दी० |
v2.c85.10
अन्येषु च —
v2.c85.11
| १. बृहत्संहिता | बृ० सं० |
| २. हेमाद्रिव्रतखण्डः | हे० व्र० ख० |
| ३. श्रीतत्वनिधिः | श्री० त० नि० |
| ४. शारदातिलकम् | शां० ति० |
| ५. सिद्धार्थसंहिता | सि० सं० |
| ६. नारदसंहिता | ना० सं० |
| ७. क्रियाक्रमोद्योतिः | क्रियाक्रम० |
| ८. श्रीमन्मन्त्रमहार्णवः | मं० म० |
| ६. मन्त्रमहोदधिः | म० महो० |
| १०. मन्त्ररत्नाकरः | म० र० |
| ११. लक्षणसमुच्चयः | ल० स० |
v2.c85.12
| १२. शरभतन्त्रम् | श० त० | २०. महालक्ष्मी-रत्नकोषः | म० ल० रत्न० |
| १३. बटुकभैरवकल्पम् | ब० भै० क० | २१. शिवतत्त्व-रत्नाकरः | शि० त० र० |
| १४. लिङ्गनिर्णयः | लि० नि० | २२. ललितोपाख्यानम् | ल० उ० |
| १५. जीर्णोद्धारशतकम् | जी० श० | २३. मल्लारि-माहात्म्यम् | म० मा० |
| १६. दत्तात्रेयकल्पम् | द० क० | २४. तुलसी-माहात्म्यम् | तु० मा० |
| १७. सुदर्शनशतकम् | सु० श० | २५. पाञ्चरात्रम् | पाञ्चरा० |
| १८. राजमातङ्गीकल्पम् | रा० मा० क० | २६. ईशानशिवगुरुदेवपद्धतिः | ई० गु० प० |
| १६. त्रिपुर-सुन्दरी-कल्पम् | त्रि० सु० क० | २७. अग्निसंहिता | अ० सं० |
v2.c85.13
१. टि०—बौद्ध-प्रतिमा-लक्षण-संकलने साधनमालायाः भागद्वयं बहूपकारि ।
२. टि०—जैन-प्रतिमा-लक्षणे जैन-ग्रन्थेषु आचारदिनकरादीनां तु साहाय्यं नीतमेव विशेषतः अपराजित-पृच्छा वास्तुसारश्चेति ग्रन्थौ बहूपकारकौ ।
v2.c85.14
ब. चित्र-लक्षणे
v2.c85.15
| १. विष्णुधर्मोत्तरम् | वि० ध० | ४. मानसोल्लासः | मानसो० |
| २. समराङ्गण-सूत्रधार-वास्तु-शास्त्रम् | स० सू० | ५. अभिलषितार्थ-चिन्तामणिः | अ० चि० |
| ३. अपराजित-पृच्छा | अ० पृ० | ६. शिल्परत्नम् | शि० र० |
v2.c85.16
पुस्तक-प्राप्तिः
v2.c85.17
१. शुक्ल-कुटी, फैजाबाद रोड, लखनऊ
२. मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली तथा वाराणसी
३. विश्वविद्यालय प्रकाशन, गोरखपुर
४. बालकृष्ण, हज़रतगंज, लखनऊ
v2.c85.18
(अन्य प्रसिद्ध बुकसेलर्स भी)
v2.c85.19
*N.B.*—Calculating all the pages this would be 878.
v2.c85.20
Vastu-Sastra Vol II
v2.c85.21
By Sh¹
v2.c85.22
B.V.Shetti 1-2-68 [stamp: 25/9/68]
v2.c85.23
T.K. Gopalakrishnan. NI 19-9=22
v2.c85.24
B.v.Shetti 8/3/69 16/1/70
v2.c85.25
Bv.Shetti 16/1/70 15.1.71
v2.c85.26
V. Shetti 15.1.71
v2.c85.27
Kardeithar.