भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c28.s2: शारदा (कश्मीरी) लिपि की उत्पत्ति
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c28.s2
- Language
- Hindi
शारदा (कश्मीरी) लिपि की उत्पत्ति
c28.s2.1
शारदा लिपि नागरी की बहिन होने से उसके उत्पत्तिक्रम में दिये हुए प्रत्येक अक्षर के रूपों में से कुछ ठीक वे ही हैं जो नागरी की उत्पत्ति में दिये हैं. इसलिये उन रूपों का वर्णन
c28.s2.2
न कर बाकी का ही किया जायगा.
c28.s2.3
अ—चौ. तीसरे से बना (बाईं ओर का अर्धवृत्त सा अंश मूल अक्षर से मिल जाने से).
c28.s2.4
इ—दू. १८; ती. २४; चौ. तीसरे से बना (ऊपर की दोनों बिंदियों को चलती कलम से लिखने से); पांच ३१ (अथर्ववेद).
c28.s2.5
ई—प. १० (‘ई’ से मिलता हुआ); दू १६ (आसीरगढ़ की मुद्रा); ती. ३० (बैजनाथ की प्रशस्ति).
c28.s2.6
उ—नागरी के समान.
c28.s2.7
ए—ती. २८; चौ. ३१ (अथर्ववेद).
c28.s2.8
ओ—प. १; दू. ६; ती. दूसरे का रूपांतर; चौ. १७ (देखो, ‘औ’ में); पांच चौथे का नीचे का अंश ऊपर की ओर अधिक बढ़ जाने से बना.
c28.s2.9
क—पांच २९. ख—चौ. २८. ग—नागरी के समान.
c28.s2.10
घ—ती. दूसरे से बना. ङ—दू. पहिले से बना. च—ती. चौ. २६.
c28.s2.11
छ—दू. ६. ज—ती. २८; चौ. २६. झ—चौ. तीसरे से बना; पांच ३१ (शकुंतल).
c28.s2.12
ञ—ती. दूसरे से बना; चौ. तीसरे को चलती कलम से लिखने से नीचे गांठ बन गई.
c28.s2.13
ट—ती. २१ (दुर्गगण का लेख). ठ—मूल रूप में बना रहा.
c28.s2.14
ड—जैन शैली की नागरी के ‘ड’ के समान.
c28.s2.15
ढ—दू १६ (उष्णीषविजयधारणी); ती. ३० (सोमवर्मन् का दानपत्र).
c28.s2.16
ण—चौ. २६. त—दू. ती. ८, चौ. २८. थ—चौ. ३१. द—पांच १८.
c28.s2.17
ध—दू. ती. १६. न—नागरी के समान (प्रारंभ की ग्रंथि को छोड़ कर).
c28.s2.18
प—नागरी के समान. फ—दू. ३१ (शकुंतल). ब—नागरी के समान.
c28.s2.19
भ—चौ. १८. म—नागरी के समान (शिररहित).
c28.s2.20
य, र, ल, व—चारों नागरी के समान. श—चौ. तीसरे से बना.
c28.s2.21
ष—नागरी के समान. स—चौ. तीसरे से बना. ह—ती. दूसरे से बना.
c28.s2.22
वर्तमान शारदा लिपि के अक्षर अपने प्राचीन रूपों से नागरी की अपेक्षा अधिक मिलते हुए हैं और उनमें पूरे स्वर वर्ण उनके प्राचीन चिह्नों से ही बने हैं.
c28.s2.23
लिपिपत्र ८३ वां.
c28.s2.24
इस लिपिपत्र में बंगला और कनड़ी लिपियों की उत्पत्ति बतलाई गई है.