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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s19: क़लम

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s19

Language
Hindi

क़लम

c30.s19.1

विद्यार्थी लोग प्राचीन काल से ही लकड़ी के पाटों पर लकड़ी की गोल तीखे मुंह की क़लम (वर्णक) से लिखते चले आते हैं. स्याही से पुस्तकें लिखने के लिये नड (बरू) या बांस की क़लमें (लेखिनी) काम में आती हैं. अजंटा की गुफाओं में जो रंगों से लेख लिखे गये हैं वे महीन बालों की क़लमों (वर्तिका) से लिखे गये होंगे. दक्षिणी शैली के ताड़पत्रों के अक्षर कुचरने के लिये लोहे की तीखे गोल मुख की क़लम (शलाका) अब तक काम में आती है. कोई कोई ज्योतिषी जन्मपत्र और वर्षफल के खरड़ों के लंबे हाशिये तथा आड़ी लकीरें बनाने में लोहे की क़लम को अब तक काम में लाते हैं, जिसका ऊपर का भाग गोल और नीचे का स्याही के परकार जैसा होता है.