भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s20: परकार
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s20
- Language
- Hindi
परकार
c30.s20.1
ज्योतिषी लोग जन्मपत्र और वर्षफल में भिन्न भिन्न प्रकार की कुंडलियां बनाने में लोहे के बने हुए पुराने ढंग के परकार अब तक काम में लाते हैं. प्राचीन हस्तलिखित पुस्तकों में कभी कभी विषय की समाप्ति आदि पर स्याही से बने कमल१ मिलते हैं वे परकारों से ही बनाये हुए हैं. वे इतने छोटे होते हैं कि उनके लिये जो परकार काम में आये होंगे वे बड़े सूक्ष्म मान के होने चाहियें.
c30.s20.2
१ मेमॉयर्स ऑफ़ दी एशियाटिक् सोसाइटी ऑफ़ बंगाल, जि. ५, प्लेट ३७ में ताड़पत्र पर लिखे हुए 'पंचरक्षा' नामक पुस्तक के एक पत्रे की जो प्रतिकृति छपी है उसमें दो कमल बने हुए हैं, एक १२ और दूसरा ६ पंखड़ी का. वे कमल इतने छोटे और उनकी परिधि की वृत्तरेखाएं इतनी बारीक हैं कि जिस परकार से वे बनाये गये हैं उसकी बड़ी सूक्ष्मता का अनुमान भली भांति हो सकता है.
Cites (1)
- Pañcarakṣā — Sanskrit