भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s21: रेखापाटी
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s21
- Language
- Hindi
रेखापाटी
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काग़ज़ों पर लिखे जानेवाले पुस्तकों के पत्रों में पंक्तियां सीधी और समानांतर लाने के लिये लेखक लोग 'रेखापाटी' काम में लाते हैं. लकड़ी की पतली पाटी पर दोनों ओर डोरा लपेट कर डोरों की पंक्तियां समानांतर की जाती हैं. फिर एक ओर के सब डोरे एकत्र कर उनके मध्य में एक पतली तीन चार इंच लंबी लकड़ी डाल कर उसको घुमाते हैं जिससे दूसरी तरफ़ की डोरों की समानांतर पंक्तियां दृढ़ हो जाती हैं और इधर उधर हटती नहीं. कोई कोई, पाटी में लंबाई की तरफ़ के दोनों किनारों के पास, समानांतर छेद कर उनमें डोरा डालते हैं. इस प्रकार की पाटी को 'रेखापाटी' कहते हैं. कोई कोई उसे 'समासपाटी' भी कहते हैं. कितने एक जैन साधुओं के पास बड़ी सुंदर रेखापाटी देखने में आती हैं. वे काग़ज़ के मज़बूत पुट्ठे या कुट्टी की बनी हुई होती हैं और उनके दोनों ओर भिन्न अंतरवाली डोरों की समानांतर पंक्तियां पाटी के साथ रोग़न से चिपकी हुई होती हैं जो कभी हिल ही नहीं सकती. रेखापाटी पर काग़ज़ रख प्रत्येक पंक्ति पर अंगुली दबा कर चलाने से काग़ज़ की लंबाई में डोरों के निशान पड़ जाते हैं. इस प्रकार एक तरफ़ निशान हो जाने के बाद काग़ज़ को उलटा कर पहिले के निशानों के मध्य में उसी तरह निशान बना लिये जाते हैं. इससे दो पंक्तियों के बीच का अंतर दो अंशों में विभक्त हो जाता है जिनमें से ऊपर-वाले में अक्षर लिखे जाते हैं और नीचे का खाली छोड़ दिया जाता है जिससे हस्तलिखित पुस्तकों की पंक्तियां समानांतर होती हैं. ऐसे ही काग़ज़ की दाहिनी और बाईं ओर जितना हाशिया रख-ना हो उतना स्थान छोड़ कर एक एक खड़ी लकीर खींच ली जाती है जिसपर पीछे से लाल स्याही
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से हाशिये की दो दो लकीरें बनाई जाती हैं. ताड़पत्रों पर लिखी हुई पुस्तकों में पंक्तियां सीधी लाने के लिये पहिले उनपर काली या रंगीन स्याही की बहुत बारीक लकीरें१ खींच ली जाती थीं अथवा लोहे की बारीक तीखे गोल मुंह की कलम से उनके निशान कर लिये जाते थे. भूर्जपत्रों पर भी ऐसा ही करते होंगे.
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१ ताड़पत्रों पर पंक्तियां सीधी और समानांतर लाने के लिये खींची हुई लकीरों के लिये देखो, मेमॉयर्स ऑव दी एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल, जि. ५, प्लेट ३६.
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