भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s13: १३—भाटिक ( भट्टिक ) संवत्
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s13
- Language
- Hindi
१३—भाटिक ( भट्टिक ) संवत्
c31.s13.1
भाटिक (भट्टिकं) संवत् जैसलमेर के दो शिलालेखों में मिला है. भट्टि या भाटिक (भाटी) नामक राजा जैसलमेर के राजाओं का प्रसिद्ध पूर्वज था जिसके नाम से उसके वंशज भाटी कहलाये. यह संवत् राजा भट्टिक (भाटी) का चलाया हुआ होना चाहिये१. जैसलमेर के लक्ष्मीनारायण के मंदिर कें शिलालेख में, जो वहां के राजा वैरिसिंह के समय का है, वि. सं. १४६४ और भाटिक संवत् ८१३ लिखा है२ जिससे वि. सं. और भाटिक संवत् का अंतर (१४६४-८१३=) ६८१ आता है. वहीं के महादेव के मंदिर के लेख में, जो रावल भीमसिंह के समय का है, वि. सं. १६७३, शक संवत १५३८ और भाटिक संवत् ६६३ मार्गशीर्ष मास लिखा है३. इस हिसाब से वि. सं. और भाटिक संवत् के बीच का अंतर (१६७३-६६३=) ६८० आता है. इन दोनों लेखों से पाया जाता है कि भाटिक संवत् में ६८०-८१ मिलाने से विक्रम संवत् और ६२३-२४ मिलाने से ई. स. आता है.
c31.s13.2
२ संवत् श्रीविक्रमार्कसमयातीतसंवत् १४६४ वर्षे भाटिके संवत् ८१३ प्रवर्तमाने महामांगल्य........चंद्रे (डॉ. श्रीधर आर. भंडारकर की संस्कृत पुस्तकों की तलाश की ई. स. १९०४-५ और १९०५-६ की रिपोर्ट, पृ. ६५).
c31.s13.3
३ स्वस्ति श्रीनृपविक्रमादिता(त्य)समयातात(तीत)संवत् १६७३ रामाश्वभूपतौ वर्षे शाके १५३८ वसुशरमशरैके प्रवर्त्तमन(र्तमाने) भाटिक ६६३ माग्र(र्ग)शिर....(उपर्युक्त रिपोर्ट, पृ. ६८).
c31.s13.4
अभी कत जैसलमेर राज्य के प्राचीन लेखों की खोज बिलकुल नहीं हुई जिससे यह पाया नहीं जाता कि कब से कब तक इस संवत् का प्रचार रहा.