भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s24: २४—सौर वर्ष
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s24
- Language
- Hindi
२४—सौर वर्ष
c31.s24.1
सूर्य के मेष से मीन तक १२ राशियों के भोग के समय को सौर वर्ष कहते हैं. सौर वर्ष बहुधा ३६५ दिन, १५ घड़ी, ३१ पल और ३० विपल का माना जाता है२ (इसमें कुछ कुछ मत भेद भी है). सौर वर्ष के १२ हिस्से किये जाते हैं जिनको सौर मास कहते हैं. सूर्य के एक राशि से दूसरी में प्रवेश को संक्रांति (मेष से मीन तक) कहते हैं. हिंदुओं के पंचांगों में मास, पक्ष और तिथि आदि की गणना तो चांद्र है परंतु संक्रांतियों का हिसाब सौर है. बंगाल, पंजाब आदि उत्तर के पहाड़ी प्रदेशों तथा दक्षिण के उन हिस्सों में, जहां कोल्लम् संवत् का प्रचार है, बहुधा सौर वर्ष ही व्यवहार में आता है. कहीं महीनों के नाम संक्रांतियों के नाम ही हैं और कहीं चैत्रादि नामों का प्रचार है. जहां चैत्रादि का व्यवहार है वहां मेष को वैशाख, वृष को ज्येष्ठ आदि कहते हैं. सौर मान के मासों में १ से २६, ३०, ३१ या ३२ तक दिनों का ही व्यवहार होता है, तिथियों का नहीं. बंगालवाले संक्रांति के दूसरे दिन से पहिला दिन गिनते हैं और पंजाब आदि उत्तरी प्रदेशों में यदि संक्रांति का प्रवेश दिन में हो तो उसी दिन को और रात्रि में हो तो दूसरे दिन को पहिला दिन (जैसे मेषार्कभुक्तदिन १, मेषगते १, मेषप्रविष्टे १) मानते हैं.