Pramāṇa · Search · About · API

भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s25: २५-चांद्र वर्ष

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s25

Language
Hindi

२५-चांद्र वर्ष

c31.s25.1

दो चांद्र पक्ष का एक चांद्र मास होता है. उत्तरी हिंदुस्तान में कृष्णा १ से शुक्ला १५ तक (पूर्णिमांत) और नर्मदा से दक्षिण में शुक्ला १ से अमावास्या तक (अमांत३) एक चांद्र मास माना

c31.s25.2

उदाहरण—शक संवत् १८४० में बार्हस्पत्य संवत्सर कौनसा होगा?
१८४०+१२=१८५२, १८५२/६०=३०, शेष ५२; इसलिये वर्तमान संवत्सर ५२ वां कालयुक्त. गत शक संवत् १८४०=गत कलियुग संवत् (१८४०+३१७६ = ) ५०१६, ५०१६+१२=५०२८, ५०२८/६०=८३, शेष ५२ गत संवत्सर; इस लिये वर्तमान = ५२ वां कालयुक्त संवत्सर.

c31.s25.3

१ उत्तरोत्तरप्रवर्द्धमानराज्य........वर्षे२प्रवर्त्तमाने सिद्धार्थे वैशाखपौर्णमास्याम् (इं. पं; जि. १६, पृ. १८ के पास का प्लेट).

c31.s25.4

२ मूल सूर्यसिद्धांत के अनुसार (पंचसिद्धांतिका).

c31.s25.5

३ मूल गणना अमांत हो ऐसा प्रतीत होता है. उत्तरी भारतवालों के वर्ष का एवं अधिमास का प्रारंभ शुक्ला १ से होना तथा अमावास्या के लिये ३० का अंक लिखना यही बतलाता है कि पहिले मास भी वर्ष की तरह शुक्ला १ से प्रारंभ हो कर अमावस्या को समाप्त होता होगा.

c31.s25.6

जाता है. ऐसे १२ चांद्र मास का एक चांद्र वर्ष कहलाता है. चांद्र वर्ष ३५४ दिन, २२ घड़ी, १ पल और २४ विपल के करीब होता है१. हिंदुओं के पंचांगों में मास, पक्ष, तिथि आदि चांद्र मान से ही हैं. चांद्र वर्ष सौर वर्ष से १० दिन, ५३ घड़ी, ३० पल और ६ विपल छोटा होता है. सौर मान और चांद्र मान में करीब ३२ महीनों में १ महीने का अंतर पड़ जाता है. हिंदुओं के यहां शुद्ध चांद्र वर्ष नहीं किंतु चांद्रसौर है और चांद्र मासों तथा ऋतुओं का संबंध बना रखने तथा चांद्र को सौर मान से मिलाने के लिये ही जिस चांद्र मास में कोई संक्रांति न हो उसको अधिक ( मल ) मांस और जिस चांद्र मास में दो संक्रांति हों उसको क्षय मास मानने की रीति निकाली है. हिंदूमात्र के श्राद्ध, व्रत आदि धर्म कार्य तिथियों के हिसाब से ही होते हैं इस लिये बंगाल आदि में जहां जहां सौर वर्ष का प्रचार है वहां भी धर्मकार्यों के लिये चांद्र मान की तिथियों आदि का व्यवहार करना ही पड़ता है. इसीसे वहां के पंचांगों में सौर दिनों के साथ चांद्र मास, पक्ष, तिथियां आदि भी लिखी रहती हैं.

Linked texts (3)