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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c5: सूचीपत्र

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c5

Language
Hindi

सूचीपत्र

c5.1

| | | | | | पृष्ठ. |
| भारतवर्ष में लिखने के प्रचार की प्राचीनता | ... | ... | ... | ... | १—१६ |
| ब्राह्मी लिपि की उत्पत्ति ... | ... | ... | ... | ... | १७—३१ |
| खरोष्ठी लिपि की उत्पत्ति | ... | ... | ... | ... | ३१—३७ |
| प्राचीन लिपियों का पढ़ा जाना | ... | ... | ... | ... | ३७—४१ |
| ब्राह्मी लिपि | ... | ... | ... | ... | ४१—५६ |
| गुप्त लिपि | ... | ... | ... | ... | ६०—६२ |
| कुटिल लिपि | ... | ... | ... | ... | ६२—६८ |
| नागरी लिपि | ... | ... | ... | ... | ६८—७३ |
| शारदा लिपि | ... | ... | ... | ... | ७३—७६ |
| बंगला लिपि | ... | ... | ... | ... | ७७—७६ |
| पश्चिमी लिपि | ... | ... | ... | ... | ७६—८२ |
| मध्यदेशी लिपि | ... | ... | ... | ... | ८२—८४ |
| तेलुगु-कनड़ी लिपि | ... | ... | ... | ... | ८४—८६ |
| ग्रंथ लिपि | ... | ... | ... | ... | ८६—६२ |
| कलिंग लिपि | ... | ... | ... | ... | ६२—६४ |
| तमिळ लिपि | ... | ... | ... | ... | ६४—६६ |
| वट्टेऴुत्तु लिपि | ... | ... | ... | ... | ६६—६७ |
| खरोष्ठी लिपि | ... | ... | ... | ... | ६७—१०२ |
| ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के अंक | ... | ... | ... | ... | १०२—१२७ |
| प्राचीन शैली के अंक | ... | ... | ... | १०२—११४ | |
| नवीन शैली के अंक | ... | ... | ... | ११५—११६ | |
| शब्दों से अंक बतलाने की भारतीय शैली | ... | ... | ... | ११६—१२१ | |
| अक्षरों से अंक बतलाने की भारतीय शैली | ... | ... | ... | १२१—१२४ | |
| खरोष्ठी लिपि के अंक ... | ... | ... | ... | ... | १२८—१२६ |
| भारतवर्ष की मुख्य मुख्य वर्तमान लिपियां | ... | ... | ... | ... | १२६—१३३ |
| भारतवर्ष की मुख्य मुख्य वर्तमान लिपियों की उत्पत्ति | ... | ... | ... | ... | १३३—१४१ |
| वर्तमान नागरी अंकों की उत्पत्ति | ... | ... | ... | ... | १४१—१४२ |
| लेखन सामग्री | ... | ... | ... | ... | १४२—१५८ |
| परिशिष्ट (भारतीय संवत्) | ... | ... | ... | ... | १५६—१८६ |
| सप्तर्षि संवत् (लौकिक संवत्) | ... | ... | ... | १५६—१६१ | |
| कलियुग संवत् ... | ... | ... | ... | १६१—१६३ | |
| वीरनिर्वाण संवत् | ... | ... | ... | १६३ | |
| बुद्धनिर्वाण संवत् | ... | ... | ... | १६४ | |
| मौर्य संवत् | ... | ... | ... | १६४—१६५ | |
| सेल्युकेंडि संवत् | ... | ... | ... | १६५ | |
| विक्रम (मालव) संवत् | ... | ... | ... | १६५—१७० | |
| शक संवत् ... | ... | ... | ... | १७०—१७३ | |
| कलचुरि (चेदि, त्रैकूटक) संवत् | ... | ... | ... | १७३—१७४ | |
| गुप्त (वलभी) संवत् | ... | ... | ... | १७४—१७६ | |
| गांगेय संवत् | ... | ... | ... | १७६—१७७ | |
| हर्ष संवत् | ... | ... | ... | १७७ | |
| भाटिक (भट्टिक) संवत् | ... | ... | ... | १७८ | |
| कोल्लम (कोलंबा संवत् | ... | ... | ... | १७८—१८० | |
| नेवार (नेपाल) संवत् | ... | ... | ... | १८०—१८१ | |
| चालुक्य विक्रम संवत् | ... | ... | ... | १८१—१८२ | |
| सिंह संवत् | ... | ... | ... | १८२—१८४ | |

c5.2

लक्ष्मणसेन संवत् . . . . . १८४—१८६ पुडुवैप्पु संवत् . . . . . १८६ राज्याभिषेक संवत् . . . . . १८६—१८७ बार्हस्पत्य संवत्सर ( १२ वर्ष का ) ... ... ... १८७ बार्हस्पत्य संवत्सर ( ६० वर्ष का ) ... ... ... १८७—१८६ ग्रहपरिवृत्ति संवत्सर . . . . . १८६ सौर वर्ष . . . . . १८६ चांद्रवर्ष . . . . . १८६—१६० हिजरी सन् . . . . . १६०—१६१ शाहूर ( अरबी, सूर ) सन् ... ... ... १६१ फसली सन् . . . . . १६२ विलायती सन् . . . . . १६२ अमली सन् . . . . . १६२ बंगाली सन् . . . . . १६२—१६३ मघि सन् . . . . . १६३ इलाही सन् . . . . . १६३—१६४ ईसवी सन् . . . . . १६४—१६५ परिशिष्ट में दिये हुए भिन्न भिन्न संवतों का ईसवी सन् से संबंध ... १६६

c5.3

लिपिपत्र १-८४

c5.4

( ब्राह्मी लिपि—लिपिपत्र १-१५ ).

c5.5

लिपिपत्र पहिला—मौर्यवंशी राजा अशोक के गिरनार के चट्टान पर के लेख से. ,, दूसरा—मौर्यवंशी राजा अशोक के अन्य लेखों से. ,, तीसरा—रामगढ़, घोसुंडी, बेसनगर आदि के लेखों से. ,, चौथा—भट्टिप्रोलु के स्तूप के १० लेखों से. ,, पांचवां—पभोसा और मथुरा के लेखों से. ,, छठा—कुशन वंशी राजाओं के समय के मथुरा, सारनाथ आदि के लेखों से. ,, सातवां—शक उषवदात और उसकी स्त्री दत्तमित्रा के नासिक के ५ लेखों से. ,, आठवां—क्षत्रपवंशी राजा रुद्रदामन् के गिरनार के चट्टान के लेख से. ,, नवां—सातवाहन (आंध्र) वंशी राजाओं के नासिक के लेखों से. ,, १० वां—पश्चिमी क्षत्रप, त्रैकूटक और आंध्रवंशी राजाओं के सिक्कों से. ,, ११ वां—दक्षिण की भिन्न भिन्न गुफाओं के लेखों से. ,, १२ वां—अमरावती और जग्गय्यपेट के लेखों से. ,, १३ वां—मोयिडवोलु से मिले हुए पल्लववंशी शिवस्कंदवर्मन् के दानपत्र से. ,, १४ वां—कोंडमुडि से मिले हुए राजा जयवर्मन् के दानपत्र से. ,, १५ वां—हीरहडगल्ली से मिले हुए पल्लववंशी राजा शिवस्कंदवर्मन् के दानपत्र से.

c5.6

( गुप्त लिपि—लिपिपत्र १६-१७ ).

c5.7

,, १६ वां—गुप्तवंशी राजा समुद्रगुप्त के अलाहाबाद के स्तंभ के लेख से. ,, १७ वां—गुप्तों के समय के भिन्न भिन्न लेख और दानपत्रों से.

c5.8

( कुटिल लिपि—लिपिपत्र १८-२३ ).

c5.9

,, १८ वां—राजा यशोधर्मन् के समय के मंदसोर के लेख से. ,, १६ वां—प्राचीन हस्तलिखित पुस्तकों तथा लेखादि से.

c5.10

लिपिपत्र २० वां—मेवाड़ के गुहिलवंशी राजा अपराजित के समय के लेख से. ,, २१ वां—राजा हर्ष के दानपत्र तथा राजा अंशुवर्मन्, दुर्गगण आदि के लेखों से. ,, २२ वां—चंबा के राजा मेरुवर्मन् के ५ लेखों से. ,, २३ वां—प्रतिहारवंशी राजा नागभट, बाउक और ककुक के लेखों से.

c5.11

( नागरी लिपि—लिपिपत्र २४-२७ ).

c5.12

,, २४ वां—जाइकदेव के दानपत्र, विजयपाल के लेख और हस्तलिखित पुस्तकों से. ,, २५ वां—देवल, धार, उदयपुर ( ग्वालियर ) और उज्जैन के लेखों से. ,, २६ वां—चंद्रदेव के दानपत्र, हस्तलिखित पुस्तक और जाजल्लदेव के लेख से. ,, २७ वां—परमार धारावर्ष, चाहमान चाचिगदेव और गुहिल समरसिंह के समय लेखों से.

c5.13

( शारदा लिपि—लिपिपत्र २८-३१ ).

c5.14

,, २८ वां—सराहां से मिली हुई सात्यकि के समय की प्रशस्ति से. ,, २६ वां—सुंगल से मिले हुए राजा विदग्ध के दानपत्र से. ,, ३० वां—भिन्न भिन्न दानपत्रों और शिलालेखों से. ,, ३१ वां—कुलू के राजा बहादुरसिंह के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से.

c5.15

( बंगला लिपि—लिपिपत्र ३२-३५ ).

c5.16

,, ३२ वां—बंगाल के राजा नारायणपाल और विजयसेन के समय के लेखों से. ,, ३३ वां—बंगाल के राजा लक्ष्मणसेन और कामरूप के वैद्यदेव के दानपत्रों से. ,, ३४ वां—बल्ललभेंद्र के दानपत्र और हस्तलिखित पुस्तकों से. ,, ३५ वां—हन्नाकोल के लेख और पुरुषोत्तमदेव के दानपत्र से.

c5.17

( पश्चिमी लिपि—लिपिपत्र ३६-४० ).

c5.18

,, ३६ वां—राजा नरवर्मन् और कुमारगुप्त के समय के मंदसोर के लेखों से. ,, ३७ वां—बलभी के राजा ध्रुवसेन और धरसेन ( दूसरे ) के दानपत्रों से. ,, ३८ वां—गहलौत सिंहादित्य और वलभी के राजा शीलादित्य ( पांचवें ) के दानपत्रों से. ,, ३६ वां—त्रैकूटकवंशी दह्रसेन और गुर्जरवंशी रणग्रह तथा दद्द ( दूसरे ) के दानपत्रों से. ,, ४० वां—चालुक्य युवराज श्र्याश्रय ( शीलादित्य ) और राष्ट्रकूट कर्कराज के दानपत्रों से.

c5.19

( मध्यदेशी लिपि—लिपिपत्र ४१-४२ ).

c5.20

,, ४१ वां—वाकाटकवंशी राजा प्रवरसेन ( दूसरे ) के तीन दानपत्रों से. ,, ४२ वां—पृथिवीसेन, महासुदेव और तिविरदेव के दानपत्रों से.

c5.21

( तेलुगु-कनड़ी लिपि—लिपिपत्र ४३-५१ ).

c5.22

,, ४३ वां—पल्लववंशी राजा विष्णुगोपवर्मन् और सिंहवर्मन् के दानपत्रों से. ,, ४४ वां—कदंबवंशी राजा मृगेशवर्मन् और काकुस्थवर्मन् क दानपत्रों से. ,, ४५ वां—चालुक्यवंशी राजाओं के लेख और दानपत्रों से. ,, ४६ वां—केंदूर से मिले हुए चालुक्यवंशी राजा कीर्तिवर्मन् ( दूसरे ) के दानपत्र से. ,, ४७ वां—कड़ब से मिले हुए राष्ट्रकूटवंशी राजा प्रभूतवर्ष ( गोविंदराज तीसरे ) के दानपत्र से. ,, ४८ वां—पूर्वी चालुक्यवंशी राजा भीम ( दूसरे ) और अम्म ( दूसरे ) के दानपत्रों से. ,, ४६ वां—कोरमंगिल से मिले हुए पूर्वी चालुक्यवंशी राजराज के दानपत्र से. ,, ५० वां—काकतीयवंशी राजा रुद्रदेव और गणपति के समय के लेखों से. ,, ५१ वां—नामय नायक, अन्नवेम और गणादेव के दानपत्रों से.

c5.23

( ग्रंथ लिपि—लिपिपत्र ५२–५६

c5.24

लिपिपत्र ५२ वां—पल्लववंशी राजाओं के समय के १० लेखों और कूरम के दानपत्र से. ,, ५३ वां—पल्लव और पांड्यवंशी राजाओं के समय के लेख और दानपत्रों से. ,, ५४ वां—पल्लववंशी नन्दिवर्मन् ( पल्लवमल्ल ) और गंगावंशी पृथ्वीपति ( दूसरे ) के दानपत्रों से ,, ५५ वां—कुलोत्तुंगचोल और विक्रमचोल के लेखों तथा बाणवंशी विक्रमादित्य के दानपत्र से. ,, ५६ वां—पांड्यवंशी सुंदरपांड्य के लेख और यादव विरूपाक्ष तथा गिरिभूपाल के दानपत्रों से.

c5.25

( कलिंग लिपि—लिपिपत्र ५७–५६ ). ,, ५७ वां—कलिंग नगर के गंगावंशी राजाओं के तीन दानपत्रों से. ,, ५८ वां—कलिंग नगर के गंगावंशी राजाओं के दानपत्रों से. ,, ५६ वां—कलिंग नगर के गंगावंशी राजा वज्रहस्त के पलांकिमेडिके दानपत्र से.

c5.26

( तामिळ लिपि—लिपिपत्र ६०–६२). ,, ६० वां—पल्लववंशी राजाओं के तीन दानपत्रों के अंत के तामिळ अंशों से. ,, ६१ वां—पल्लवतिलक दंतितवर्मन् और राष्ट्रकूट कृष्णराज ( तीसरे ) के लेखों से. ,, ६२ वां—राजेंद्रचोल, विरूपाक्ष और वालककामय के लेखादि से.

c5.27

( वट्टेळुत्तु लिपि—लिपिपत्र ६३–६४ ). ,, ६३ वां—जटिलवर्मन् और वरगुणपांड्य के लेखादि से. ,, ६४ वां—श्रीवल्लभगोडे, भास्करावरचिवर्मन् और वीरराघव के दानपत्रों से.

c5.28

( खरोष्ठी लिपि—लिपिपत्र ६५–७० ). ,, ६५ वां—मौर्यवंशी राजा अशोक के शहबाज़गढ़ी और मान्सेरा के लेखों से. ,, ६६ वां—हिंदुस्तान के ग्रीक ( यूनानी ), शक, पार्थिअन् और कुशनवंशी राजाओं के सिक्कों से. ,, ६७ वां—मथुरा तथा तक्षशिला से मिले हुए लेखों से. ,, ६८ वां—पार्थिअन् राजा गोंडोफरस और कुशनवंशी राजा कनिष्क के समय के लेखों से. ,, ६६ वां—वर्डक् ( अफ़ग़ानिस्तान में ), आग़ा, पाजा और कल्डरा के लेखों से. ,, ७० वां—तक्षशिला, फतहजंग, कनिहारा, पथियार और चारसड्डा के लेखों से.

c5.29

( प्राचीन अंक—लिपिपत्र ७१–७६ ). ,, ७१ वां—ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन शैली के अंक ( १ से ६ तक ). ,, ७२ वां—ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन शैली के अंक ( १ से ६, और १० से ६० तक . ,, ७३ वां—ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन शैली के अंक ( १० से ६० तक ). ,, ७४ वां—ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन शैली के अंक ( १०० से ६०० तक ). ,, ७५ वां—ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन शैली के अंक ( १००० से ७००० तक ); मिश्र-अंक, और ब्राह्मी से निकली हुई लिपियों के नवीन शैली के अंक ( १ से ६ और ०). ,, ७६ वां—ब्राह्मी से निकली हुई लिपियों के नवीन शैली के अंक ( १ से ६ और ० ), तथा खरोष्ठी लिपि के अंक.

c5.30

( वर्तमान लिपियां—लिपिपत्र ७७–८१ ). ,, ७७ वां—वर्तमान शारदा ( कश्मीरी ), टाकरी और गुरमुखी लिपियां. ,, ७८ वां—वर्तमान कैथी, बंगला और मैथिल लिपियां. ,, ७६ वां—वर्तमान उड़िया, गुजराती और मोडी ( मराठी ) लिपियां. ,, ८० वां—वर्तमान तेलुगु, कन्नड़ी और ग्रंथ लिपियां. ,, ८१ वां—वर्तमान मलयाळम्, तुळु और तामिळ लिपियां.

c5.31

( वर्तमान लिपियों की उत्पत्ति—८२–८४ ). ,, ८२ वां—वर्तमान नागरी और शारदा ( कश्मीरी ) लिपियों की उत्पत्ति. ,, ८३ वां—वर्तमान बंगला और कन्नड़ी लिपियों की उत्पत्ति. ,, ८४ वां—वर्तमान ग्रंथ और तामिळ लिपियों तथा नागरी अंकों की उत्पत्ति.

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