Pracin Bharatiya Veshabhusha c10.s6: दक्षिणी वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c10.s6
- Language
- Hindi
Contents
दक्षिणी वेश-भूषा
c10.s6.1
अर्धचित्रों और भित्तिचित्रों क आधार पर यह कहा जा सकता है कि उत्तर और दक्षिण भारत की वेश-भूषा में अधिक अंतर नहीं था फिर भी दोनों में कुछ स्थानिक अंतर तो था ही। दक्षिण भारत की वेश-भूषा के अध्ययन के लिए पर्याप्त साधन हमें अमरावती के प्रथम युग के अर्धचित्रों, कार्ले और भाजा के लेणों के अर्धचित्रों में और अजंटा की नं० ९ और १० लेणों के भित्तिचित्रों से मिलते हैं। अमरावती में एक सद्गृहस्थ की वेश-भूषा करीब करीब वैसी ही है जैसे सांची के अर्धचित्रों में एक सद्गृहस्थ की। वे कुछ लंबोतरा साफा बांधते थे, धोती घुटनों तक पहुंचती थी और कई लड़ रस्सियों से बने कमरबंद के अंत में एक फब्वा लटका करता था (आ० ११२)६२। कार्ले की लेण के अर्धचित्रों में धोती जरा फटी दिखलायी गयी है और उमेठे कपड़े का बना कमरबंद बगल में लटकता दिखलाया गया है६३। कार्ले में पगड़ी छोटी और कसकर बंधी दिखलायी गयी है।
c10.s6.2
६२ शिवराममूर्ति, अमरावती स्कल्पचर्स इन दि मद्रास गवर्नमेंट म्युजियम, प्ले० १८,१
c10.s6.3
६३ बर्जेस, रिपोर्ट आन दि बुद्धिस्ट केव टेंपल्स, प्ले० २५, २
c10.s6.4
भाजा के के अर्धचित्रों से दक्षिण की वेश-भूषा पर काफी प्रकाश पड़ता है और उनमें दक्षिणी झलक भी साफ़ देख पड़ती है। भाजा की वेश-भूषा के आकार प्रिंस आफ वेल्स म्यूजियम में भाजा अर्धचित्रों के प्लास्टर की प्रतिकृतियों से लिये गये हैं।
हाथी पर बैठे राजा और ध्वजवाहक की वेश-भूषा
c10.s6.t1.1
राजा के शीश पर गुंबददार पगड़ी बंधी है जो मोती या मनकों की लड़ों स सजी है। हाथों में मनकों की लड़ी से भर बांह के कंगन और गले में मनकों की बनी छलड़ी माला है।
c10.s6.t1.7
राजा के कमर में एक सिला हुआ लहंगानुमा वस्त्र है जिसकी चूंदनेँ साफ साफ देख पड़ती हैं। राजा के पीछे बैठे हुए ध्वजवाहक के सिर पर एक अटपटी सी बंधी पगड़ी है जिससे तीन फेरे निकलते दिखलाये गये हैं। पगड़ी का एक छोर गालों को घेरता हुआ और ठुड्डी के नीचे से होकर दूसरी तरफ पगड़ी में खोंस दिया गया है। वह एक पूरे बांह का कंचुक भी पहने है जिसका दामन लहरिये के आकार में कटा हुआ है।
c10.s6.t1.8
द्वारपाल (आ० ११४) सिर पर मोती या मनकों की लड़ों से सजी हुई गुंबददार पगड़ी है, गले में खारदार और चपटे मनकों के कंठे हैं। दाहिने कंधे से होता हुआ एक परतला है जिसके छोर से कृपाण लटक रही है। धोती के एड़ी के कुछ ऊपर पहुंचती है और कमरबंद कमर में लपेट लिया गया है। कमरबंद से पटका लटक रहा है।
c10.s6.t1.9
सिपाही (आ० ११५) हल्की एक लट्टू वाली पगड़ी जिसके बाहर कुछ बाल की लटें निकली हैं बायें कंधे से होता हुआ दुपट्टा, कछाड़ेदार धोती और कमरबंद।
c10.s6.t1.10
पगड़ी पगड़ी (आ० ११६) अनेक पेंचो वाली घुमावदार पगड़ी (उष्णीषरत्न) जिसमें तीन पर जैसे निकले हैं।
c10.s6.t1.11
स्त्रियों के शिरोवस्त्र (१) ओढ़नी के ऊपर सिरपेंच जैसा आभरण, सिरपेंच की नीचे की लड़ियां फुल्लेदार गोल तख्तियों से बनी हैं (आ० ११७)। (२) भारी भरकम ओढ़नी जिसकी कई तहें सिर पर पड़ती है, सीसमांग और बद्धी बेना, सिर के मध्य में एक पहियानुमा टिकरा, ललाट पर एक गोल टीका (आ० ११८)। (३) शीश पर पगड़ी जैसा कोई आच्छादन जिसके बायें ओर कुछ दाने से निकले हैं। गले में खारदार, डोलकनुमा और चपटे मनकों के कंठे (आ० ११९)। (४) सिर पर मूंगरी के आकार का गोलियाया वस्त्र (आ० १२०) जिसका एक छोर गोले के ऊपर होता हुआ दूसरी ओर खोंस दिया गया है। (५) मस्तक पर जूट बंधी वेणी (आ० १२१) जिसमें शायद फीते लगे हैं। (६) पगड़ी नीचे के फेंटे कान तक आ जाते हैं (आ० १२२)।