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Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s1: राज पुरुषों का पहनावा

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s1

Language
Hindi

राज पुरुषों का पहनावा

c12.s1.1

गांधार की मूर्तिकला में राजे और सामंत एड़ियों तक लटकती सिलवटदार धोती तथा कंधों को ढकती तथा बायीं बाहु पर होती पीछे फेंकी हुई चादर पहनते थे । चादर की सिलवटों को कड़ा बनाये रखने के लिए एक भारी वजन चादर में पीछे बंधा रहता था (आ० १२५)१ । चादर पहनने के इस तरीके में कलात्मक रेखाएं और सिलवटें पड़ती थी (आ० १२६)२ । कभी कभी चादर छाती नहीं ढकती थी (आ० १२७-१२८)३ । और कभी कभी वह पूरी छाती ढकती हुई केवल दाहिना कंधा खुला छोड़ देती थी (आ० १२९)४ । बैठने में चादर दाहिने कंधे और छाती को नहीं ढकती पर गोद में उसकी सुंदर सिलवटें देख पड़ती हैं (आ० १३०)५ । डोरी या गोंट के बने कमरबंद के दोनों झब्बेदार सिरे कमर से धोती को खिसकने से रोकने के लिए आगे लटकते रहते थे६ । गांधार में उच्चवर्ण के लोग चप्पियां अथवा खड़ाऊं पहनते थे । राजाओं के जूते रत्नजटित होते थे । कटियस के अनुसार राजा सुभूति ऐसे ही जूते पहनते थे७

c12.s1.2

२ फूशे, वही, आ० ४१६

c12.s1.3

४ फूशे, वही, आ० ३६२

c12.s1.4

५ ए० एस० आई० एन० रि०, १६११-१६१२, प्ले० ४०, ११

c12.s1.5

७ हिस्टो० अले०, ६।१।५

c12.s1.6

९ फूशे, वही, आ० ३६४, ३६६, ३६७