Pracin Bharatiya Veshabhusha c12.s8.t1: पुरुषों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c12.s8.t1
- Language
- Hindi
पुरुषों की वेश-भूषा
c12.s8.t1.1
मथुरा के कुषाणयुग की मूर्तिकला में तत्कालीन भारतीयों और विदेशियों की वेश-भूषा संबंधी प्रचुर सामग्री है। भारतीय प्रायः सकच्छ धोती, जिसका अधिक हिस्सा कमर में लिपटा होता था और बायीं ओर फंदेदार हो जाता था, पहनते थे७०। वे कंधों पर होता तथा केहुनियों पर गिरता दुपट्टा और नाभि के पास खुंसा और घुटनों के बीच लटकता पटका भी पहनते थे (आ० १७७)। कभी कभी उच्च वर्ग के नागरिक अपनी धोती खिसकने से बचाने के लिए शिखाकार मुट्ठीवाला कमरबंद जिसका एक झब्बेदार छोर पैरों के बीच में लटका करता था, पहनते थे। वे एक तरह का दुपट्टा भी पहनते थे जिसका एक सिरा बायें कंधे से पीठ पीछे होता हुआ तथा दाहिने घुटने को ढाकता हुआ फंदे के आकार का हो कर बायीं कलाई पर स्थिर हो जाता है (आ० १७८)७१। कभी कभी रस्सी की तरह बटा कमरबंद ढीली तरह से पहना जाता था (आ० १७९)७२। दुपट्टे और कमरबंदों के पहनने के और बहुत से तरीके दिखाये गये है (आ० १८०-१८३)७३। कमरबंद के कई फंटों से बंधी लुंगी घुड़सवार, सईस इत्यादि पहनते थे (आ० १८४)७४।
c12.s8.t1.2
७० फोगेल, ला स्कल्पत्यूर द मथुरा, प्ले० ७, सी० डी०
c12.s8.t1.3
७१ वही, प्ले०, ३५ बी०
c12.s8.t1.4
७२ वही, प्ले० २१ बी०
c12.s8.t1.5
७३ ए० एस० आई० एन० रि० १६११-१२, प्ले० ५७, आ० १२-१५
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७४ फोगेल, वही, प्ले० ८ बी०
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१७९
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