Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s1: राजदरबारों में सिले विदेशी वस्त्रों का प्रभाव
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s1
- Language
- Hindi
राजदरबारों में सिले विदेशी वस्त्रों का प्रभाव
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कुषाणयुग में इस देश में सिले वस्त्र काफी संख्या में आए इसके पहले भी बहुत प्राचीन काल से इस देश में सिले वस्त्रों का ज्ञान था। उन लोगों की वेश-भूषा पर जिनका राज दरबार से निकट संबंध था इसका कुछ अंशों तक असर पड़ा। उनके सुंदर कारखाने कंचुक और जांघिये इस बात के द्योतक हैं कि तत्कालीन राजे अपने सेवकों की वरदी का पूरा ध्यान रखते थे। अक्सर लोगों का यह विश्वास है कि सिले कपड़े पहने हुए वे नौकर विदेशी थे जिन्होंने बाहर से आकर राजा की नौकरी स्वीकार कर ली थी। यह बात कुछ
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नौकरों के लिए तो ठीक हो सकती है पर उनमें अधिकतर तो इसी देश के रहने वाले थे। सेवकों और सेविकाओं के जो वर्णन बाण भट्ट ने आए हैं और जिन्हें हमने आगे चल कर दिया है, उनसे हमारे मत की पुष्टि होती है।