Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s13: व्यवहारसूत्र में कपड़े बनने के प्रसिद्ध स्थल
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s13
- Language
- Hindi
व्यवहारसूत्र में कपड़े बनने के प्रसिद्ध स्थल
c13.s13.1
व्यवहारसूत्र भाष्य में १०३ एक जगह उन जगहों की सूची दी हुई है जहां कपड़े बनते थे। समुद्र पार (पारावतर्दि) विदेशों से भी लगता है कपड़े आते थे। टीकाकार के अनुसार यहां आदि से पौंड्र का मतलब है। व्यवहारसूत्र के भाष्य में जो शायद गुप्तयुग में लिखा गया था कोटंब, ताम्रलिप्ति और सिंधु कपड़े बनाने के बड़े केन्द्र थे। टीकाकार ने कोटंब की व्याख्या गौड़ देश के अर्थात् बंगाली कपड़े से की है पर शायद यह ठीक नहीं है। जैसा बौद्ध साहित्य से पता चलता है कोटुंबर १०४ औदुंबर देश (पठान कोट) में बनता था। ऐसा पता चलता है कि ग्यारहवीं सदी में जब व्यवहार भाष्य की टीका लिखी गयी कोटुंबर की याद इतनी हलकी पड़ गयी थी कि टीकाकार ने उसे पंजाब से उठा कर बंगाल में रख दिया। ताम्रलिप्ति अर्थात् कलकत्ते के पास आधुनिक तामलुक भी उस युग में कपड़े बनाने का प्रसिद्ध केन्द्र था। सिंधु प्रदेश भी कपड़ों के लिए प्रसिद्ध था।
c13.s13.2
१०३ व्यवहारसूत्र भाष्य, ७, ३
c13.s13.3
१०४ भारतीय विद्या, १, १, पृ० ४०