Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s25: राज कर्मचारी, दूत, लेखक इत्यादि की पोशाकें
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s25
- Language
- Hindi
राज कर्मचारी, दूत, लेखक इत्यादि की पोशाकें
c13.s25.1
बाण ने बहुत सी जगहों में राज्य कर्मचारियों, दूतों, भिक्षकों, लेखकों इत्यादि के पहरावे का वर्णन किया है। बाण की वर्णनात्मक शैली इतनी प्रौढ़ थी कि वे जरा में ही एक व्यक्ति या धरका का सजीव चित्र खड़ा कर देते थे । उदाहरणार्थ, हर्ष के भाई कृष्ण द्वारा बाण के पास भेजे हुए इनकी वेश भूषा का चित्र एक पंक्ति में ही मिल जाता है। "उसका चंडातक कमरबंद से बंधा था और उसके खुले बाल पीछे की ओर एक कपड़े से बंधे
c13.s25.2
थे१३३। दूत का यह छोटा सा वर्णन हमारे सामने धावा मार कर आये धूल धूसरित दूत की वेश भूषा का चित्र एक पंक्ति में मिल जाता है। ऐसा लगता है कि प्रतिहारी और महा प्रतिहारी सफेद कंचुक पहनते थे१३४ और कमरबंद बांधते थे१३५।
c13.s25.3
१३३ कार्पटिक-चैलचीरिकानिवर्तोलचण्डखण्डातकं, पृष्ठ-प्रेङ्खलत-पट्टच्चरखटितगलित-ग्रन्थिम्, हर्षचरित, पृ० ४१।
c13.s25.4
१३४ क्षीभ्रकञ्चुकाच्छिन्नवपुषा, हर्षचरित, पृ० ४६; कञ्चुकावच्छन्नवपुषा, कादंबरी, पृ० ३५।
c13.s25.5
१३५ हर्षचरित, पृ० ४६।
c13.s25.6
सन्यासी भैरवाचार्य की वेशभूषा की तुलना अगर हम आज कल के सन्यासी की वेशभूषा से करें तो हमें बाण की दृष्टि की सत्यता का पता चल जायगा। एक जगह उन्हें वैकक्ष्य की तरह गेरुआ उत्तरीय तथा छाती तक पहुंचता गेरुआ कोपीन पहने दिखलाया गया है१३६। एक दूसरी जगह जब उनकी श्रीहर्ष से मुलाकात हुई तब वे काला कंबल१३७ एक क्षौम का कोपीन पहने थे तथा रेशमी पर्यङ्क बंध से उनका शरीर बंधा था। वे पादुका भी पहने थे१३८।
c13.s25.7
१३७ कृष्णकंबल-प्रावरण, हर्षचरित, पृ० २६३
c13.s25.8
१३८ पाण्डर-पवित्रक्षौमावृत-कौपीनं, सावष्टंभ-पर्यंकबंध-मण्डिळतेनामृतफेन-श्वेताश्वाभोग पट्टकेन, हर्षचरित पृ० २६५।
Cites (2)
- Harṣacarita — Bāṇabhaṭṭa, Sanskrit
- Kādambarī — Bāṇabhaṭṭa, Sanskrit