Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s33: चादरें
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s33
- Language
- Hindi
चादरें
c13.s33.1
भिन्न भिन्न तरह के पांच पांच दूष्यों के दो जोड़ नागरिक व्यवहार में लाते थे। पहले जोड़ में कोमव, प्रावारक, दाढ़िकालि, पूरिका और विरलिका आये हैं। जिनके निम्नलिखित अर्थ दिये गये हैं[^१७३।
c13.s33.2
१७३ वही, ४, ३८२३
c13.s33.3
१—कोयव—इसे रुई भरी दुलाई बतलाया गया है गो कि इसका प्राचीन अर्थ रोएँदार कंबल था।
c13.s33.4
२—प्रावारक—इसे नेपाल का थल्मे जैसा बड़ा कंबल (नेपालदि, उल्वण रोमा बृहत् कंबलाः) कहा गया है। लगता है टीका में तालिका के नंबर बदल जाने से कोयव और प्रावार के अर्थों में गड़बड़ी पड़ गई है क्योंकि साधारणतः कोयव का अर्थ रोएंदार कम्बल और प्रावार का अर्थ रुई भरी दुलाई होती है।
c13.s33.5
३—दाढ़िकालि—यह बहुत सफेद धुली हुई चादर होती थी जिसके किनारों पर दांत जैसे अलंकार बने होते थे।
c13.s33.6
४—पूरिका—इसकी बिनावट झिल्लड़ होती थी। इसका दूसर अर्थ पाट की बनी चादर भी होता था।
c13.s33.7
५—विरलिका—दोसूती
c13.s33.8
दूसरे जोड़ में उपधान, तूलि, आलिंगिका, गंडोपधान और मसूरिका नाम की तकियों का वर्णन है[^१७४।
c13.s33.9
१७४ वही, ४, ३८२४
c13.s33.10
(१) उपधान—परों से भरी तकिया।
c13.s33.11
(२) तूलि—साफ रुई (संस्कृत तूत) अथवा मदार की रुई से भरी तकिया।
c13.s33.12
(३) आलिंगणिका—गाव तकिया। यह तकिया शरीर की लंबाई जितनी होती थी, और सोते समय पैरों के बीच रख ली जाती थी।
c13.s33.13
(४) गंडोपधान—सिर के नीचे एक तरफ रक्खी जाने वाली तकिया। लगता है यह तकिया गोल होती थी। (५) मसूरक—यह गोल गद्दी (चक्कल गद्दिदकादि) कपड़े अथवा चमड़े की बनी होती थी और रूई से बनी होती थी ।