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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s40: भिक्षुणियों के वस्त्र

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s40

Language
Hindi

भिक्षुणियों के वस्त्र

c13.s40.1

भिन्न भिन्न निकाय की भिक्षुणियों के वस्त्र पहनने की रीति उन निकायों के भिक्षुओं के वस्त्र पहिरने की रीतियों के अनुसार होती थी२२४ । वे उत्तरासंग, अन्तरवास और संकक्षिका तो अपने निकाय के भिक्षुओं के तरह की पहनती थीं पर उनके निवसन पहनने का तरीका भिन्न था । निवसन के लिए कुसूलक शब्द का प्रयोग होता था क्योंकि इसका आकार कुसूल की तरह होता था । यह घाघरेनुमा वस्त्र एक वस्त्र के दोनों सिरों को सीकर बनाया जाता था । कपड़ा चार हाथ लंबा और दो हाथ चौड़ा होता था । घाघरा नाभि से ले कर एंड़ी के चार अंगुल ऊपर तक पहुंचता था । पहिनने में पहले घाघरे के अंदर खड़े हो कर फिर उसे ऊपर खींच लिया जाता था । घाघरे का सिरा कमर पर संकुचित कर के पीछे बांध लिया जाता था२२५ । साधारणतः भिक्षुणियां अपनी छाती और बगलें नहीं ढांकती थीं, पर युवावस्था स्तनों के उभार होने पर वे उन्हें ढंक सकती थीं२२६ ।

c13.s40.2

२२२ वही

c13.s40.3

२२४ वही, पृ० ६७

c13.s40.4

२२५ वही, पृ० ७८

c13.s40.5

२२६ वही, पृ० ७८

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