Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s5: रांकव
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s5
- Language
- Hindi
रांकव
c13.s5.1
रंकु संज्ञा से बना रांकव शब्द टीकाकारों के अनुसार रंकु पशु अथवा ऐसे ही किसी दूसरे पशु के रोएं से बने ऊनी कपड़े का द्योतक था। पर रंकु की पहचान उन्हें नहीं थी। रांकव का एक सीधा सादा अर्थ जो हमारे समझ में आता है वह यह है। पामीर के ऊंचे पठारों और मैदानों में एक किस्म के बकरे होते हैं जिन्हें वहां के रहने वाले रंग कहते हैं। शाल दुशाले बनाने के लिए अच्छा से अच्छा पश्म हमें इन बकरों से मिलता है११। पामीर का यह रंग ही शायद संस्कृत का रंकु है। अगर रंकु और रंग की समानता ठीक है तो रांकव के अर्थ होंगे पामीर के आसपास में बना पश्मीना। जैसा महाभारत से पता चलता है पश्म के नमदे (रांकव कट) भी बनते थे१२।
c13.s5.2
११ वुड, ए जर्नी टु आक्सस, लंदन, १८४१, यूल द्वारा इन्ट्रोडक्टरी एसे, पृ० ५७
c13.s5.3
१२ महाभारत, ३, २२५, ६