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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s9: कपास के बने वस्त्र

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s9

Language
Hindi

कपास के बने वस्त्र

c13.s9.1

गुप्त युग में प्रायः जितनी तरह के कपड़े बनते थे उनके उल्लेख हमें संस्कृत और प्राकृत साहित्यों से मिलता है । पर आश्चर्य की बात है कि इस युग में सूती कपड़ों के बारे में हमें अधिक जानकारी नहीं मिलती । इसका कारण यही हो सकता है कि सूती कपड़े इतने प्रचलित थे कि उनके बारे में कुछ अधिक कहना उचित नहीं समझा गया । इसमें शक नहीं कि इस युग में बनारस, बंगाल तथा दक्षिण में अच्छे से अच्छे कपड़े बनते थे । लगता है आचारांग में आये गजंभ, स्फटिक इत्यादि सूती वस्त्र थे । बृहद् कल्पसूत्र भाष्य८९ में एक जगह रुई कातने की विधि दी हुई है । पहले 'सेड्डुग' नामक रुई से बिनौले निकाल लिए जाते थे और बाद में वह धुन ली (पिञ्जितम) जाती थी । अंत में इस साफ रुई की पूलियां (पेलु) कातने के लिए बना ली जाती थीं ।

c13.s9.2

८९ बृहद्, ३, २६६६