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Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s16: शिकारी और बहलियों की वेश-भूषा

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s16

Language
Hindi

Contents

शिकारी और बहलियों की वेश-भूषा

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१७ नं० की लेण में मातृपोषक जातक नाम के भित्ति-चित्र में शिकारी और बढ़क छोटी धोती पहने दिखलाये गये हैं, और उनके बाल फीतों से बंधे हैं६९। उसी लेण के षड्दंत जातक नामक चित्र में बढ़क जो किसी जंगली जाति के मालूम पड़ते हैं पेटीदार जांघिया जिसमें कटार खुंसी है, पहनते हैं (आ० ३२४)७०। पकड़े ग षड्दंत गज को दंडवत करते हुए एक बढ़क की चप्पल दर्शनीय है। यह चप्पल आधुनिक पठानी चप्पलों की तरह एड़ी पर एक तस्मे से बंधी है (आ० ३२५)। लंगोटी पहरे हुए तथा धनुषबाण और दंड से युक्त

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६९ वही, प्ले० २०, २२

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७० प्ले० २७, २९

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एक ठेठ जंगली आदमी भी उसी दृश्य में दिखलाया गया है (आ० ३२६)। शंखपाल जातक में दाहिनी ओर एक नाग को रस्सी से घसीटता हुआ शिकारी चारखानेदार लंगोटी पहने है (आ० ३२७)७१। इसी दृश्य में एक दूसरे शिकारी की धारीदार लंगोटी की धारियों पर तीर के फल अथवा उड़ती चिड़ियों के रूढ़िगत अलंकार बने हैं।

c14.s16.11

७१ —याजदानी, वही १, प्ले० ११

शिकारी की वेश-भूषा

c14.s16.t1.1

उच्चपदस्थ मनुष्यों की शिकारी वेश-भूषा दूसरे ही तरह की होती थी। १७ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक बाणसंधान करता हुआ जमीन पर खड़ा शिकारी कमर तक पहुंचता कंचुक जिसमें नीचे सुनहरी गोंट लगी है, सफेद पाजामा और बूट पहने है (आ० ३२८)। उसका साथी एक चाकदार कंचुक जिसके ऊपर किसी दूसरे वस्त्र का कोना देख पड़ता है पहने है।