Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s20: वादकों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s20
- Language
- Hindi
वादकों की वेश-भूषा
c14.s20.1
गुप्तकालीन भूमरा के मंदिर में अर्ध चित्रों में एक नरसिंहा बजाने वाला कुलाहनुमा टोपी, जिसकी चोटी जरा आगे झुकी है, घुटनों के नीचे पहुंचता चाकदार कंचुक और पाजामा पहने है (आ० ३४०)८५। हुडुक्क बजाता हुआ एक दूसरा वादक चोटीदार टोपी, कामदार कोट और पाजामा पहने है (आ० ३४१)। एक गायक कूर्पासक और सकच्छ धोती पहने है (आ० ३४२)। एक शहनाई बजाने वाला हल्की चोटीदार टोपी पहने है (आ० ३४३)। ढोल बजाने वाले की टोपी गोल है (आ० ३४४) और नर्तक की टोपी झालरदार है (आ० ३४५)।
c14.s20.2
८५ बेनर्जी, दि शिव टेंपिल एट भूमरा, प्ले० १०, कलकत्ता, १९२४
c14.s20.3
१७ नं० की लेण के एक भित्ति चित्र में आकाशचारी एक गंधर्व सफेद और भूरी रंग की धारियों वाली धोती और भूरी और हरी धारियों से सज्जित कमरबंद, जो धोती से मिलान खाता है, पहरे है८६। उसी लेण के एक दूसरे भित्ति-चित्र में एक दूसरा गवैंया सफेद जमीन पर हरी लहरिया वाली धोती पहने है८७।
c14.s20.4
८६ हेरिगम, प्ले० २, २
c14.s20.5
८७ वही, प्ले० २
c14.s20.6
एक वीणावादक का, जो अपनी वीणा कंधे पर रक्खे है, पहरावा आकर्षक है। वह औरों की तरह धोती, कमरबंद और पेटी पहने है। एक रूमाल गले से बँधा है। कमरबंद और रूमाल के छोर हवा में फड़फड़ा रहे हैं। दो जूड़ों में बंधे बालों में केशरक लगे हैं (आ० ३४६)८८।
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८८ वही, प्ले० ३६, ४०