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Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s38: नाचने, बजाने और गाने वाली स्त्रियों की वेश-भूषा

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s38

Language
Hindi

नाचने, बजाने और गाने वाली स्त्रियों की वेश-भूषा

c14.s38.1

ग्वालियर रियासत के पवांय नामक स्थान से मिले हुए एक प्राक्-गुप्त या नाग-युग के उतरंग में एक नृत्य का दृश्य अंकित है। इस अर्ध चित्र में आयी वेश-भूषा का काफी महत्त्व बुंदेलखंड मालवा की वेश-भूषा के इतिहास के लिए है। इस दृश्य में आठ बजाने वाली मध्य में एक नर्तकी को घेर कर बैठी हैं। यह नर्तकी घुटनों तक की धोती पीछे लांग मार कर पहने हैं। साड़ी अथवा धोती पहनने का यह ढंग बुंदेलखंड में अभी तक प्रचलित है। उसकी छाती बायें कन्धे पर सकरमृद्धी लगे वैकक्ष्य से ढंकी है। उसका केश वेश फेरबंददार है।

c14.s38.2

पृष्ठिका में बजानेवालियां तथा नर्तकी तरह तरह की धोतियां और सामने बंधने वाली चोलियां पहने हैं (आ० ४१६) १७१।

c14.s38.3

१७१ एन० रि० आ० डि०, ग्वा०, १९३०-३१, प्ले० ८

c14.s38.4

१७ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में मंजीरा बजाती हुई एक परियों का गिरोह दिखलाया गया है । वे साड़ियां और सुंदरता से बंधे कमरबंद पहनती हैं और उनके दुपट्टे पीछे फड़कते हैं१७२। १ नं० की लेण के एक भित्ति-चित्र में एक गायक एक लंबा नीला और धारीदार रेशम का बना कंचुक पहने है । धारियों के बीच में हम पेचक, वृषभ और हंसों की आलंकारिक आकृतियां देखते हैं (आ० ४१७)१७३ । ये अलंकार पड़ी पट्टियों में हैं जिनके दोनों ओर वृत्तों से सजी पट्टियां हैं। उसी गिरोह में एक नर्तकी बूंदरी का बना कंचुक पहनती है।

c14.s38.5

१७२ हेरिगम, वही, प्ले० ५७

c14.s38.6

१७३ याजदानी, वही, भा० १, प्ले० १० ए

c14.s38.7

१ नं० की लेण के महाजनक जातक वाले भित्ति-चित्र में नर्तकी एक लंबा, गहरे भूरे रंग का वृत्तों से अलंकृत पूरे बांह का कंचुक पहरे है (आ० ४१८)१७४। इस कंचुक के ऊपर एक एप्रन जैसा वस्त्र है जिसके पक्ष अंग संचालन के सुभीते के लिए ऐसे कटे हैं कि उसके निचले कोने अलग से झूलते हैं१७५। उसका लंबा घाघरा बैगनी, हरी और पीली धारियों से सुसज्जित है जिन की सफेद जमीन पर नग बने हैं। ढोल बजाने वाली की छाती एक धारीदार स्तनपट्ट से, जिसकी गट्ठी पीछे बंधी है और छोर नीचे लटक रहे हैं, ढंकी है। उसकी जांघिया अथवा घघरी के बीच में एक नग जवाहरि से सुसज्जित पट्टी लगी है (आ० ४१९) ।

c14.s38.8

१७४ वही, प्ले० १२-१३

c14.s38.9

१७५ इस वस्त्र की तुलना सारनाथ में मिले गुप्तयुग के उत्तरंग पर एक नर्तकी के वस्त्र से कर सकते हैं । साहनी, वही, प्ले० २७

c14.s38.10

बाघ के एक भित्ति-चित्र में गायिकाओं के दो गिरोह दिखलाये गये हैं। बायीं ओर के गिरोह में एक नर्तकी को चारों ओर से घेर कर सात बजाने वालियां खड़ी हैं । नर्तकी एक पूरे बांह का हरियाली लिए हुए घुटने तक पहुंचता पीले रंग का कंचुक, जो वृत्त-बिंदु अलंकार से सुसज्जित है, पहने हैं। कंचुक चाकदार है और उसके मुहरियों और चाकदार किनारों पर गोट लगी है। चौड़ा कोणाकार गला लगता है पीछे से पोशाक की सुन्दरता बढ़ाने के लिए लगा दिया गया था। पाजामा हरियाली लिए हुए पीली धारियों से सुसज्जित है और उसका कंचुक से खूब जोड़ बैठता है (आ० ४२०)१७६ । उसका सिर सुनहली धारियों वाले एक रुमाल से ढंका है। टिपरी बजाने वाली, जो ढोल बजाने वाली के बगल में खड़ी है, के बायें कंधे पर एक नील और सुनहरी धारियों वाला दोहरा रुमाल है (आ० ४२१) । उसके बगल में खड़ी एक दूसरी टिपरी बजाने वाली हरी और नीली धारियों वाला घाघरा पहने है । उसका कंचुक का बदामा गला खुला है (आ० ४२२) । नर्तकी के दाहिनी ओर खड़ी तीन टिपरी बजाने

c14.s38.11

१७६ मार्शल, वही, प्ले० बी०

c14.s38.12

वालियों में बीच वाली एक आसमानी रंग की जबर्वाहियां कंचुकी पहने है जो छाती को ढाकती हुई घुटनों तक पहुंचती है। घघरी में हरी धारियां हैं और उनके बीच की सादी पट्टियों पर कटकुट हैं (आ० ४२३ ए० बी०)।

c14.s38.13

बजाने वालियों और नर्तकी के दूसरे गरोह में बैठी हुई नर्तकी पहले गरोह की नर्तकी जैसा ही पहरावा पहने है। उसके पीछे खड़ी एक बजानेवाली फाख्तई रंग की चोली जो शायद रुपहले किंखाब की बनी है पहरे है। उसकी एप्रन की काट पहले गिरोह की एक गाने वाली के कंचुकी की काट जैसी है।

c14.s38.14

बाग के एक और भित्ति-चित्र में एक स्त्री गायिकाओं का गिरोह है उसमें सबकी सब चोलियां पहने हैं। बीच वाली गायिका सफेद चित्ती वाली हरी चोली पहने है। उसके बायीं ओर वाली नर्तकी मुकुट पहने है और उसका जूड़ा एक सफेद रुमाल से ढंका है, उसके नीचे कंचुक पर एक एप्रन की शक्ल वाला वस्त्र है। नर्तकी की बगल वाली गायिका आसमानी रंग की अबव‌हियां चोली पहने है१७७।

c14.s38.15

१७७ वही, प्ले० सी०

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