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Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s7: अजंटा के भित्ति-चित्रों में बोधिसत्वों की रूढ़िगत वेश-भूषा

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s7

Language
Hindi

अजंटा के भित्ति-चित्रों में बोधिसत्वों की रूढ़िगत वेश-भूषा

c14.s7.1

गुप्त-युग के सिक्के और अजंटा के भित्ति-चित्र ही हमारे गुप्त कालीन वेश-भूषा की जानकारी के प्रधान साधन हैं । अजंटा के भित्ति-चित्रों में राजे और राज पुरुष धोती और गहरे काम वाले मुकुट पहने दिखलाये गये हैं । पगड़ी तो शायद ही कहीं आती है । लेकिन सिक्कों में तो गुप्त राजे धोती, दुपट्टा, कंचुक और पायजामे पहने दिखलाये गये हैं। वे पगड़ी और कभी कभी टोपी भी पहनते थे, पर प्रायः वे अपने सिर नंगे रखते थे । अजंटा के भित्ति-चित्रों में और सिक्कों पर आये राजाओं की वेश-भूषाओं में जो फर्क आ जाता है, उसका कारण शायद भित्ति-चित्रों में बोधिसत्वों के देवत्व की कल्पना है। इन बोधिसत्वों की वेश-भूषा में हम मूर्ति रचना के मध्यकालीन नियमों का आरम्भ देखते हैं। अजंटा के भड़कीले मुकुट उन्हीं मध्यकालीन नियमों की देन मालूम पड़ते हैं, क्योंकि तत्कालीन साहित्य में तो ऐसे मुकुटों के वर्णन नहीं से हैं । भड़कीले मुकुट और गहने पहने हुए अजंटा के बोधिसत्वों को हम तत्कालीन ऐसी ही विष्णु की मूर्तियों की श्रेणी में रख सकते हैं और इसीलिए हम इनके वस्त्राभूषणों से उस युग के राजाओं के वस्त्राभूषणों की तुलना नहीं कर सकते । जैसा हम पहले देख चुके हैं, हर्षचरित के राजों का पहरावा कीमती कपड़ों का तो अवश्य होता था, पर वह चड़क भड़क से तो बहुत दूर रहता था । अजंटा के भित्ति-चित्रों और गुप्त सिक्कों पर राजाओं की वेश-भूषा में अन्तर के कारण सिक्कों पर आई वेश-भूषा का ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्व बढ़ जाता है । नीचे के पृष्ठों में सिक्कों और चित्रों में आई राजाओं की वेश-भूषा का वर्णन दिया जाता है ।