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Pracin Bharatiya Veshabhusha c14.s8.t1: समुद्रगुप्त

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c14.s8.t1

Language
Hindi

समुद्रगुप्त

c14.s8.t1.1

साधारण भांति के सिक्कों पर समुद्रगुप्त अधबाँहिया कंचुक अथवा कोट जिसके चाकदार नुकीले कोने नीचे लटक रहे हैं तथा जिसके आगे पर दोनों घुंडीदार

c14.s8.t1.2

कसीदे का काम है पहिने है (आ० २८१)११। अधिकतर सिक्कों में तो कंचुक के दो ही नुकीले कोने होते हैं लेकिन एक सिक्के में१२ चारों कोने दिखलाये गये हैं। इस कंचुक की तुलना मथुरा से मिली हुई एक शक योद्धा की मूर्ति के कंचुक से की जा सकती है१३। समुद्रगुप्त का पाजामा ढीला शलवार न होकर चूड़ीदार है और इनके सिर पर सटकर बैठने वाली टोपी है । जूते अर्धजंघा किस्म के हैं ।

c14.s8.t1.3

११ —एलन, केटलाग ऑफ दि कॉयन्स ऑफ दि गुप्त डाइनेस्टी एण्ड शशांक किंग ऑफ गौड, प्ले० १, ११, लंदन १६१४

c14.s8.t1.4

१२ —वही, प्ले० १, ५

c14.s8.t1.5

१३ —अग्रवाल, हैंड बुक ऑफ दि कर्जन म्यूजियम ऑफ आर्कियोलोजी, प्ले० २१ तथा जे० बाई० एस० ओ० ए०, १६४०, पृ० २०६।

c14.s8.t1.6

साधारण भांति के कुछ दूसरे सिक्कों में कंचुक पूरी बांह का है बांहें चपकी न होकर ढीली हैं और कलाइयों पर मोड़ी हुई हैं (आ० २८२)१४। बूट जंघा किस्म का है और उसमें बटन लगे हैं ।

c14.s8.t1.7

१४ —एलन, वही, प्ले० १, ११-१३

c14.s8.t1.8

साधारण भांति के तीसरी किस्म के सिक्कों में अधबहियां कंचुक का संयोग जांघिये के साथ है । घुटनों के नीचे तक पहुंचते जूतों के जोड़ पर फुल्ले लगे हैं (आ० २८३)१५ ये बूट साहित्य में आये खपुसा की तरह हैं ।

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१५ —वही, प्ले० १

c14.s8.t1.10

व्याघ्र-पराक्रम भांति के सिक्कों में राजा मुड़ी आस्तीन वाला कसा हुआ कंचुक, बटा हुआ कमरबंद, घुटनों के ऊपर तक पहुंचती जांघिया और कुषाण कालीन पगड़ी, जिस पर शीर्षपट्ट लगा हुआ है, पहने है (आ० २८४)१६।

c14.s8.t1.11

१६ —वही, प्ले० १, १४-१७

c14.s8.t1.12

चंद्रगुप्त-कुमार देवी भांति के सिक्कों में चन्द्रगुप्त चाकदार जामा, जिसके गले पर घुंडीदार काम है और फूंदने लटक रहे हैं, पहनता है । जामा के मध्य में तुक-मेक की पंक्ति है (आ० २८५ ए० बी० सी०)१७। ब्रीचेस ऐसे पाजामे पर गरारीदार खपुसा किस्म के जूते हैं।

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१७ —वही, प्ले० २, १४

c14.s8.t1.14

समुद्रगुप्त के वीणावादक भांति के सिक्कों से पता चलता है कि राज के थकाने वाले कामों से छुट्टी पा कर आराम के समय अथवा संगीत का आनंद लेते हुए गुप्त राजे सादी धोती और टोपी पहनते थे (आ० २८६)१८। अपने घरेलू जीवन में गुप्त राजे ऐसी सादी वेश-भूषा पसंद करते थे, इसका पता हमें चन्द्रगुप्त द्वितीय के आसंदिक सिक्कों से लगता है१९। यहां आसंदी पर बैठे राजा एक धोती पहने हैं।

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१८ —वही, प्ले० ३, १

c14.s8.t1.16

१९ —वही, प्ले० ५