Pramāṇa · Search · About · API

Pracin Bharatiya Veshabhusha c5.s2: सिंधु सभ्यता में पहनने के कपड़े

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c5.s2

Language
Hindi

सिंधु सभ्यता में पहनने के कपड़े

c5.s2.1

सूती वस्त्र खंड के मिलने से यह विचार स्वाभाविक ही है कि मोहेनजोदड़ो में भांति भांति के वस्त्र पहने जाते रहे होंगे लेकिन वस्त्रों के इतिहास के सम्बन्ध में जो कुछ भी सामग्री हमें मोहेनजोदड़ो और हड़प्पा से मिली है उससे हमारी वह धारणा गलत सिद्ध होती है । एक मनुष्य मूर्ति एक लंबी चादर पहने हुए है (चि० १-२ ) यह चादर छाती ढकती हुई बाएं कंधे पर डाल दी गई है, बांयां हाथ खाली है । यह चादर काफी लंबी होती थी और बैठने पर पैरों तक पहुंच जाती थी। पत्थर की एक दूसरी मूर्ति एक तहमत नुमा कपड़ा पहने हुए है ३ । बाएं कंधे के नीचे एक अनिर्धारित रेखा से शायद चादर का तात्पर्य हो। अगर हमारा अनुमान ठीक है तो चादर दाहिने कंधे को ढकती थी। लेकिन चादर पहिनने का यह ढंग अनियमित सा है क्योंकि अब तक मिली हुई मूर्तियों में चादर बांयें कंधे को ही ढांकती हुई दिखलायी गयी है; उनका दाहिना कंधा हमेशा खुला हुआ होता है ।

c5.s2.2

२ मार्शल, मोहेनजोदड़ो एंड इंडस वेली सिविलाइजेशन १, पृ० ३३, प्लेट ९८

c5.s2.3

३ मेके, फरदर एक्सकेवेशंस एट मोहेनजोदड़ो, भा० १, पृ० २५७; भा० २, प्ले० १०५, सं० ६०-६१

c5.s2.4

यह कहना तो कठिन है कि आदमी चादर के नीचे धोती, लंगोटी या तहमत ऐसा कोई वस्त्र बराबर पहिना करते थे क्योंकि मनुष्य मूर्तियां प्रायः नंगी बतलायी गयी हैं। लेकिन मुद्राओं पर चित्रित देवता और वीर पुरुष एक बहुत संकरा कोपीन पहने हुए दिखलाये गये हैं। हड़प्पा से मिले हुए एक ठीकरे पर बनी हुई मनुष्य मूर्ति ४ एक तंग मोहरी वाला पाजामा या धोती पहने हुए दिखलायी गयी है ।

c5.s2.5

४ मेके, इंडस वैली सिविलाइजेशन, पृ० १०३

c5.s2.6

हड़प्पा और मोहेनजोदड़ो से अभी तक जो सामग्री हमें मिली है उसके आधार पर यह कहना मुश्किल है कि सिंधु सभ्यता के लोग सिले हुए कपड़ों से अवगत थे अथवा नहीं। केवल एक मूर्ति कमीज जैसा वस्त्र पहिने हुए है जो कमर पर एक डोर से बंधी हुई है ५ ।

c5.s2.7

५ मेके, उपरोक्त

c5.s2.14

बाल बहुधा फीते से बंधा होता था (आ० १)। लगता है मनुष्य कभी कभी नोकदार चपकी हुई टोपी भी पहनते थे। इस टोपी की नोक या तो फीते से बंधी हुई एक तरफ झुकती हुई दिखलाई गई है (आ० ३)६ या वह पेंचदार है (आ० ४)७।

c5.s2.15

कभी कभी दुपट्टे की तरह का वस्त्र मनुष्य गले में पहने दिखलाये गये हैं। यह एक तरफ झुकता हुआ होता है (आ० ५)८। बटन या ब्रूच से बंधा हुआ यह दुपट्टा प्रायः दोहरा होता था (आ० ६)९। डा० मेके१० का यह अनुमान है कि यह दुपट्टा शायद किसी पद के अधिकार का अथवा किसी धर्म विशेष का द्योतक है ।

c5.s2.16

६ ६—मार्शल, वही, प्ले० ६४, ११

c5.s2.17

९ ९—वही, प्ले० ७६, १५

c5.s2.18

१० १०—वही, भा० १, पृ० २६२

Linked texts (2)