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Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s1: ऊनी वस्त्र

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s1

Language
Hindi

ऊनी वस्त्र

c6.s1.1

आर्य कातने और बुनने के लिए भेड़ों का ऊन व्यवहार में लाते थे और इसीलिए भेड़ को वे ऊर्णावती१ कहते थे और ऊन को आविक२। सिंध की घाटी को सुवासा ऊर्णावती इसलिए कहा गया है कि वहां ऊन और ऊनी कपड़े बहुतायत से मिलते थे३ । गंधार की भेड़ें प्रसिद्ध थीं४ और जिस प्रदेश से रावी (परुष्णी) बहती थी वहां का रंगीन अथवा धुला हुआ (सुन्ध्यवः) ऊनी कपड़ा प्रसिद्ध था५। पूषण द्वारा ऊनी कपड़े विनने का भी उल्लेख है६ ।

c6.s1.2

१ ऋ० वे०, ८।६७।३

c6.s1.3

२ बृहदारण्यक उ०, २।३।६

c6.s1.4

३ ऋ० वे०, १०।७५।८

c6.s1.5

४ ऋ० वे०, १।१२६।७

c6.s1.6

५ ऋ० वे०, ४।२२।२ ; ५।५२।६

c6.s1.7

६ ऋ० वे०, १०।२६।६

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