Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s16: नीवि
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s16
- Language
- Hindi
नीवि
c6.s16.1
नीवि या परिधान७८ शायद तहमत या लुंगी के ऐसा कोई वस्त्र था जिसे स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से व्यवहार में लाते थे। नीवि की व्युत्पत्ति नि अर्थात् नीचे और व्ये
c6.s16.2
७८ बृहदारण्यक उप०, ६।१।१०
c6.s16.3
ढकना या आच्छादित करना से की गयी है । लेकिन डा० सरकार इसे चौड़ा बुना हुआ किनारा मानते हैं और इस शब्द की व्युत्पत्ति तमिल नइ से जिसके अर्थ बुनने के होते हैं करते हैं७९। जब तक वैदिक काल की कोई मूर्ति हमें नहीं मिलती तब तक हम यह ठीक तौर से नहीं कह सकते कि वैदिक नीवि का क्या रूप था। लेकिन सिंधु सभ्यता की मुद्राओं और मृण्मूर्तियों में जो पोशाक दिखलायी गयी है वह तो केवल एक कपड़े का संकरा सा टुकड़ा है जिसे स्त्री और पुरुष दोनों लपेट लिया करते थे । इस तरह के वस्त्र पहनने का रिवाज सिंधु सभ्यता की समकालीन सभ्यताओं में भी था। हो सकता है कि वैदिक युग में देश का यह पुराना पहरावा बच गया हो और कालांतर में आर्यों द्वारा अपना लिया गया हो ।
c6.s16.4
७९ —सरकार वही, पृ० ६३, फु० नो० ६
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