Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s26: यज्ञ के अवसर पर स्त्रियों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s26
- Language
- Hindi
यज्ञ के अवसर पर स्त्रियों की वेश-भूषा
c6.s26.1
यज्ञ के समय स्त्रियों की वेश-भूषा का तो पूरा वर्णन नहीं मिला पर उनकी पोशाक में रसना का एक विशेष महत्व होता था। यज्ञ के अवसर पर अध्वर्यु यजमान की पत्नी की कमर में एक रस्सी बांधता था (योक्त्रेण सन्नह्यति) ।१२७ शतपथ के अनुसार इस क्रिया का लाक्षणिक अर्थ यह था कि स्त्री के नाभि से नीचे शरीर का भाग अपवित्र माना जाता था । यह रसना अधिवास के ऊपर बांधी जाती थी । ऐसा करने से स्त्री में पवित्रता कैसे आ जाती थी इसे शतपथ१२८ में बहुत घुमा फिरा कर समझाया गया है। शतपथ के अनुसार वस्त्र वनस्पति के प्रतीक हैं और रस्सी वरुणपाश की प्रतीक है और इसीलिए स्त्री की रक्षा के लिए उसके शरीर और वरुणपाश के बीच में औषधि यानी वस्त्र रखे गये हैं। सम्भवतः इस मंत्र में रसना के जादू भरे गुण और वस्त्रों के रक्षक शक्ति की ओर इशारा किया गया है।
c6.s26.2
१२७ शत० ब्रा०, १।३।१।१३
c6.s26.3
१२८ शत० ब्रा०, १।३।१।१५-१४