Pracin Bharatiya Veshabhusha c6.s29: व्रात्यों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c6.s29
- Language
- Hindi
व्रात्यों की वेश-भूषा
c6.s29.1
अभी यह तो ठीक ठीक से कहा नहीं जा सकता कि व्रात्य आर्यों के समाज से बहिष्कृत जन थे या इस देश के आदिवासी जिनके धार्मिक और सामाजिक विचार आर्यों से भिन्न थे । पंचविंश ब्राह्मण में प्रायश्चित्त के बाद इनके पुनः आर्य संस्कृति में लाये जाने का उल्लेख है । इसी प्रकरण में व्रात्यों के वस्त्रों पर भी कुछ प्रकाश डाला गया है। व्रात्यों के गृहपति उष्णीष, काली गोंट वाला कपड़ा (कृष्णसंवासः) बकरे की एक सफेद और दूसरी काली खाल (कृष्णावलक्षे अजिने) पहनते थे । इनके पास चाबुक (प्रतोद) बिना वाण वाले धनुष (शायद नावक के तीर या ब्लो पाइप से मतलब हो) और तख्तों के बने रथ (विपथश्च फलकास्तीर्णः) होते थे। इनके गले में निष्क नाम की मालाएं होती थीं १३१। इन गृहपतियों के अनुयायी व्रात्यों के वस्त्रों के किनारे (वलूकान्तानि) लाल होते थे और उनसे निकली छोरें वटी हुई होती थीं (दामतूषाणि) । वे जूते पहनते थे और बकरे की दो जुड़ी हुई खालें ओढ़ते थे १३२ । लाट्यायन श्रौत सूत्र१३३ में व्रात्यों को लाल उष्णीष, लाल वस्त्र (लोहित वाससो) और कुरते (उरुषोत) पहने बतलाया गया है। व्रात्य अपनी पगड़ी टेढ़ी बांधते थे (तिय्यंङ् नद्धं) १३४
c6.s29.2
१३१ पंचविंश ब्रा०, १७।१।१४
c6.s29.3
१३२ वही, १७।१।१५
c6.s29.4
१३३ ला० श्रौ० सू०, ८।५।८
c6.s29.5
१३४ वही, ८।६।७
c6.s29.6
सूत्रों के समय व्रात्यों के वस्त्रों के संबंध में सब आचार्य एक राय नहीं थे। शांडिल्य के१३५ अनुसार उनके वस्त्र काले न होकर चितकबरे होते थे। गौतम१३६ के अनुसार उनके वस्त्र सफेद (शुक्ल) होते थे और उनके किनारे काले (कृष्णदशं) होते थे।
c6.s29.7
१३५ वही, ८।६।१२
c6.s29.8
१३६ वही, ८।६।१३
c6.s29.9
उपरोक्त विवरण से पता चलता है कि व्रात्य शायद धोती पगड़ी और दो बकरे की खालें वस्त्र रूप में व्यवहार करते थे । साधारण श्रेणी का व्रात्य शायद लाल किनारे की धोती जिसमें बटी छीरें होती थीं, पगड़ी, दो बकरे की खालें और जूते पहनता था।
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