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Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s12: करघे और उनके भाग

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s12

Language
Hindi

करघे और उनके भाग

c7.s12.1

ऐसा मालूम पड़ता है कि बौद्ध युग के आरंभिक युग में बौद्ध भिक्षुओं को कपड़े बिनने की स्वतंत्रता थी। इसी प्रकरण में करघा (तंतक), ढरकी (वेमक), टट्टी (शलाका) और छोर (वट्ट) के नाम आये हैं९५। जहां तक मुझे पता है कम से कम किसी भारतीय धर्म ने साधुओं और भिक्षुओं को कपड़े बुनने की स्वतंत्रता नहीं दी है। बुनाई की आज्ञा देकर बौद्ध धर्म अपनी प्रगतिशीलता का परिचय देता है।

c7.s12.2

९५ चुल्लवग्ग, ५।२७।२