Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s16: आकर्षक ढंग से कपड़े पहनने की प्रथा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s16
- Language
- Hindi
आकर्षक ढंग से कपड़े पहनने की प्रथा
c7.s16.1
बौद्ध साहित्य से पता चलता है कि लोग अपने कपड़े बड़े शौक से संवार बना कर पहनते थे। वैशाली के नागरिक कपड़ों के बड़े शौकीन थे। महापरिनिब्वान सुत्त१०५ में कहा गया है कि यह समाचार पाकर बुद्ध अंबपालिका के यहां पधारने वाले हैं वैशाली के नागरिक आतुरतापूर्वक उनसे मिलने चले। उन्होंने अपने शरीर के रंगों से मेल खाते हुए वस्त्र और आभूषण धारण कर रखे थे। सांवले रंग के आदमी गहरे रंग का वस्त्राभूषण पहिने थे, साफ रंग के लोग हल्के कपड़े और गहने पहने थे। स्त्रियां भी अपने बनाव श्रृंगार में रंगों के मिलान पर बड़ा ध्यान देती थीं। जातकों में एक जगह कहा गया है१०६ कि विरुपाक्ष की पुत्री कालकण्णी ने सुचिपरिवार नाम सेट्ठी से मिलते समय नीले रंग का वस्त्र, नील विलेपन और नील मणियों से अपना श्रृङ्गार कर रक्खा था। लेकिन श्रेष्ठी को यह रंगविन्यास पसंद नहीं आया और उसने अपनी राय कालकण्णी से साफ साफ कह दी।
c7.s16.2
१०५ महापरिनिब्वान सुत्त, २, १८
c7.s16.3
१०६ जातक (३८२), ३, पृ० ५५
Linked texts (5)
- Cullavagga — Pāli
- Mahāparinibbānasutta — Pāli
- Jātaka — Pāli
- Āyāraṃga — Sudharman, Ardhamāgadhī Prakrit
- Pātimokkha — Pāli