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Pracin Bharatiya Veshabhusha c7.s3: कौशेय

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c7.s3

Language
Hindi

कौशेय

c7.s3.1

हम दूसरे अध्याय में कह चुके हैं शायद कौशेय का उल्लेख सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण में आता है। पाणिनि की अष्टाध्यायी में१३ तो कौशेय के लिए एक अलग सूत्र ही है। रामायण१४ में सीता को पीला रेशमी वस्त्र पहिने बतलाया गया है (पीते कौशेय वाससी) बौद्ध साहित्य१५ में कौशेय का उल्लेख है और रेशमी चादर (कौशेय प्रावार) पहनने की अनुमति बुद्ध ने भिक्षुओं को दी है१६। प्राचीन जैन ग्रंथ आचारांग सूत्र में कौशेय का उल्लेख नहीं है पर पट्ट१७ शब्द से शायद रेशम का बोध होता हो। इसी सूत्र के वस्त्रों की तालिका में चीनांसुक या चीन के बने रेशमी वस्त्र का भी उल्लेख है। चीन शब्द के आने से इस तालिका की प्राचीनता पर संदेह किया जा सकता है पर अभी तक यह प्रश्न विवादास्पद है कि चीन शब्द भारतीय साहित्य में कब से आया। जैसा हम चौथे अध्याय में देखेंगे चीन के बने रेशमी वस्त्रों का उल्लेख कौटिल्य अर्थशास्त्र में भी आया है, और महाभारत के सभापर्व में बाह्लीक और चीन के बने कीटज और पट्टज१८ वस्त्रों का उल्लेख है। बाह्लीक और

c7.s3.2

८ जातक, भाग ६, पृ० ४७

c7.s3.3

१३ अष्टाध्यायी, ४।३।४२

c7.s3.4

१४ रामायण, २।४०।६

c7.s3.5

१५ जातक, भा० ६, पृ० ४७

c7.s3.6

१६ महावग्ग, ८।१।३६

c7.s3.7

१७ आ० सू०, २।५।१।४

c7.s3.8

१८ महाभारत, २।४७।२२

c7.s3.9

चीन के उल्लेख से शायद मध्य एशिया के उस बड़े रास्ते की ओर इशारा है जिससे होकर चीन से रेशम भारत और शाम आता था।

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