Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s10: विदेशों से आने वाले कपड़े
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s10
- Language
- Hindi
विदेशों से आने वाले कपड़े
c8.s10.1
हम ऊपर कह आए हैं कि मौर्य काल में भारतवर्ष में वस्त्रों के नाम उनके प्राप्ति स्थान पर भी पड़ जाते थे। पर कौटिल्य के अर्थशास्त्र में इस बात का कम उल्लेख है कि भारतवर्ष की आधुनिक सीमा के बाहर से यहाँ कौन से कपड़े आते थे। महाभारत के सभा पर्व से इस प्रश्न पर काफी प्रकाश पड़ता है। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के अवसर पर
c8.s10.2
६४-६५ ग० शा० १, पृ० २८१; शा० शा०, पृ० १३६
c8.s10.3
६६-६७ ग० शा० १, पृ० २७६-२७७, शा० शा० पृ० १३५
c8.s10.4
भारतवर्ष के अनेक गणतंत्र और राजे तथा उसके सीमा पर बसने वाली जातियां उपहार लेकर आयीं। इन उपायनों में उन प्रदेशों के बने वस्त्र भी थे जिनसे पता चलता है कि ई० पू० भारत में विदेशों से अच्छे से अच्छे कपड़े आते थे और भारत, चीन और अफगानिस्तान का व्यापारिक संबंध बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा है। अब हमें देखना चाहिए कि किन किन देशों से यहां वस्त्र आते थे।
Linked texts (1)
- Kauṭilīya Arthaśāstra — Kauṭilya, Sanskrit