Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s3: ऊदबिलाव के चमड़े
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s3
- Language
- Hindi
ऊदबिलाव के चमड़े
c8.s3.1
(१३) सातीना१५—यह काले रंग का होता था।
c8.s3.2
(१४) नलतूला१६—इसका रंग नल नाम की घास के रेशों की तरह होता था।
c8.s3.3
१६ ग० शा० १, पृ० २४८; शा० शा० पृ० ११९
c8.s3.4
(१५) वृत्तपुच्छ१७—चमड़ा भूरे रंग का होता था और उसमें ऊदबिलाव की गोल पूंछ भी रहती थी।
c8.s3.5
समूरों के चुनाव में कौटिल्य की राय है कि मुलायम चिकने और गञ्झिन समूर ही सब से अच्छे होते हैं१८।
c8.s3.6
बनों के प्रकरण में१९ और तरह के साधारण चमड़ों का उल्लेख अर्थशास्त्र में आया है। इनमें गोह, सेरक (एक विशेष प्रकार की गोह), चीता, सूस, सिंह, व्याघ्र, हाथी, भैंसा, सुरा गाय और गयाल के चमड़े मुख्य थे। इन चमड़ों का बहुत से कामों में उपयोग होता था।