Pracin Bharatiya Veshabhusha c9.s1: शुंगयुग में पुरुषों की वेश-भूषा
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c9.s1
- Language
- Hindi
शुंगयुग में पुरुषों की वेश-भूषा
c9.s1.1
भरहुत (ई० पू० १३५-१५०) के अर्ध चित्रों में हमें तत्कालीन भारतीय वेश-भूषा का एक अच्छा चित्र मिलता है। आदमी धोती पहनते थे जिसका एक छोर कमर में लपेट लिया जाता था और लांग पीछे खोंस ली जाती थी। भरहुत के अर्धचित्रों में धोती, घुटनों के जरा नीचे और पैरों के मध्य भाग तक पहुंचती दिखलायी गयी है। धोती बिना किसी अलंकार के सादी होती थी। धोती के साथ लोग दुपट्टे, कमरबंद, पटके और पगड़ियां भी पहनते थे। नीचे के विवरणों से ई० पू० दूसरी शताब्दी में भारतीयों की वेश-भूषा स्पष्ट हो जायगी—
c9.s1.2
५ वही, प्ले० ५, १७
c9.s1.3
१—कामदार साफा, घुटने के नीचे लटकती हुई चपकी धोती, बटी हुई रस्सियों से बना कमरबंद जिसके दोनों छोर लटक रहे हैं (चुल्लवग में ऐसे कमरबंद को कलावुक कहा गया है); पटका जो पट्टियों पर सिली गुरियों से बना मालूम पड़ता है; बदन का ऊपरी भाग नंगा है; बांयें कन्धे पर पड़े हुए दुपट्टे का एक छोर पीछे लटक रहा है७ (आ० १८)।
c9.s1.4
७ कनिघम, भरहुत, प्ले० २२
c9.s1.5
२—घुटने की नीचे तक लटकती धोती, सकरमुद्दीदार कमरबंद जिसके दोनों छोरों में छीरें हैं; चूननदार एड़ियों तक लटकता हुआ पटका; दुपट्टा खिसक कर कमर पर आ गया है८ (आ० १९)।
c9.s1.6
८ वही, प्ले० २१
c9.s1.7
३—कामदार पगड़ी, दुपट्टा, पट्टी का बना कमरबंद, पटका (आ० २०)९।
c9.s1.8
९ वही, प्ले० १४
c9.s1.9
४—पगड़ी, गले में ढीला दुपट्टा जिसके लटकते हुए छोर तिकोने कटे हैं, कमरबंद के दोनों छोर एक बकसुए से निकलते दिखाये गये १० (आ० २१)।
c9.s1.10
१० वही, प्ले० २२, २
Cites (1)
- Cullavagga — Pāli