Vastu-shastra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c82: विषयानुक्रमणिका
Vāstu-śāstra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c82
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- English
विषयानुक्रमणिका
v2.c82.1
| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| १. प्राक्कथनम् | | १२. प्रतिमायां रसोन्मेषः | ६२-६६ |
| विषयानुक्रमणी | १-८ | १३. प्रतिमा-प्रतिष्ठापनम् | ६६-६७ |
v2.c82.2
प्रथमो खण्डः
v2.c82.3
प्रतिमाविज्ञानम् ९-६७
v2.c82.4
१. प्रतिमा-निर्माणोपक्रमविधिः ९-१०
२. प्रतिमा-प्रकाराणि—बिम्बभेदाः १०
३. द्रव्यभेदेन बिम्बभेदाः—प्रतिमा-द्रव्याणि तत्फलभेदाश्च ११-१४
४. प्रतिमा-मान-लक्षणम् १४-१६
५. प्रतिमा-निर्माणे मानाधाराणां पञ्च-पुरुष-स्त्री-लक्षणम् १६
६. तालमानं तालनियमश्च १६-१८
७. मानभेदपूर्वकं प्रतिमा-विधानम् (प्रलम्बलक्षणमूर्ध्वासनाचर्चादयश्च) १८-३३
८. प्रतिमा-विधाने मधूच्छिष्ट-विधानम् ३३-३४
९. प्रतिमा-विधाने दोषाःतत्फलञ्च ३५-४०
१०. प्रतिमा-रूप-संयोगे अ. आसनानि ४० ब. वाहनानि—हंसगरुडवृषभाः ४०-४३ स. आयुधाः—षट्त्रिंशदायुधाः ४३-४५ द. आभूषणानि ४६-५५
(i) मौलि-लक्षणम् ४६
(ii) भूषण-लक्षणम् ४६-४८
(iii) षोडशाभरणानां लक्षणम् ४८-५२
(iv) किरीटादिलक्षणम् (आभूषणानि वस्त्राणि च) ५२-५५ य. प्रतिमा-मुद्राः ५६-५८
(i) असंयुत-संयुत-नृत्त-हस्तप्रभेदैः ६४ हस्त-मुद्राः ५६
(ii) वैष्णवादिषड् स्थानकमुद्राः ५६-५७
(iii) ऋज्वागतादिस्थान-लक्षणम् ५७-५८
११. प्रतिमा-निष्पत्तिः (नयनोन्मीलनम् ) ५९-६२
v2.c82.5
द्वितीयो खण्डः
v2.c82.6
प्रतिमा-लक्षणम् ७०-२९३
v2.c82.7
प्रथमो पटलः
v2.c82.8
त्रिमूर्त्यादिब्राह्मप्रतिमालक्षणम् ७०-७६
v2.c82.9
त्रिमूर्ति-लक्षणे
v2.c82.10
१. ब्रह्म-विष्णु-महेश्वराः ७०
२. हरि-हर-पितामहः ,,
३. चन्द्रार्क-पितामहः ,,
४. हरि-(सूर्योऽपि) हर-हिरण्यगर्भः ,,
५. नरनारायणहरिकृष्णाः ,,
v2.c82.11
द्विमूर्ति-लक्षणे
v2.c82.12
१. हर्यर्धमूर्तिः ७१-७२
२. कृष्ण-शङ्कर-मूर्तिः ७२ ब्राह्म-प्रतिमा-लक्षणम् ७२-७५ ब्राह्म-लाञ्छन-रहस्यम् ७५-७६ ब्रह्मायतनम् ७६ ब्रह्मणोऽष्टप्रतीहाराः ७६
v2.c82.13
द्वितीयो पटलः
v2.c82.14
वैष्णव-प्रतिमा-लक्षणम् ७७-१०९
v2.c82.15
१. साधारणमूर्तयः ७७-७९
२. असाधारणमूर्तयः ७९-८६
(i) अनन्तशायी नारायणः ७९-८०
(ii) नारायणवासुदेवः ८०-८१ संकर्षणादयश्च ८१ (अ) वासुदेवादित्रयम् ८२ (ब) संकर्षणादित्रयम् ८२ (स) प्रद्युम्नादित्रयम् ८३ (य) अनिरुद्धादित्रयम् ८३ (र) अन्याः वासुदेवजाः मूर्तयः ८३-८४
v2.c82.16
| विषयाः पृष्ठः | विषयाः पृष्ठाः |
| (iii) मानुषो वासुदेवः ८४ | ७. आयुधपुरुषाः- |
| (iv) त्रैलोक्यमोहनः ८४ | आयुधपौरुषमूर्तयः १०३-१०५ |
| (v) विश्वरूपः ८४-८५ | वैष्णवी द्वारावती १०५-१०७ |
| (vi) वैकुण्ठः ८५ | वैष्णव-प्रतिमा-पूजनफलम् १०७ |
| (vii) अनन्तः ८५ | वैष्णवलाञ्छनरहस्यम् १०७-१०८ |
| (viii) योगेश्वरः ८६ | विष्ण्वायतनम् १०८-१०९ |
| (ix) लक्ष्मीनारायणौ ८६ | विष्णो रष्टप्रतीहाराः १०९ |
| ३. वैष्णव-द्वादश-ध्रुवबेराणि ८६-८९ | # तृतीयो पटलः |
| १. योगस्थानकमूर्तिः ८६-८७ | शैव-प्रतिमा-लक्षणम् ११०-१९९ |
| २. भोगस्थानकमूर्तिः ८७ | ( लिङ्गप्रतिमाः रूपप्रतिमाश्च ) |
| ३. वीरस्थानकमूर्तिः ८७ | लिङ्गप्रतिमा-लिङ्गलक्षणम् ११०-३३ |
| ४. आभिचारिकस्थानकमूर्तिः ८७ | लिङ्गव्युत्पत्तिः ११० |
| ५. योगासनमूर्तिः ८७-८८ | लिङ्गभेद-प्रभेदाश्च ११०-१११ |
| ६. भोगासनमूर्तिः ८८ | लिङ्गनिवेशः-लिङ्गविभागाः १११-१४ |
| ७. वीरासनमूर्तिः ८८ | लिङ्गपीठम् ११४-१९ |
| ८. आभिचारिकासनमूर्तिः ८८ | चलाचलप्रभेदेन द्रव्यभेदेन फलभेद- |
| ९. योगशयनमूर्तिः ८८-८९ | प्रदर्शनपुरस्सरं क्षणिकलिङ्गलक्षणम्- |
| १०. भोगशयनमूर्तिः ८९ | ११९-२० |
| ११. वीरशयनमूर्तिः ८९ | मृन्मयादिलिङ्गलक्षणम् १२०-२९ |
| १२. आभिचारिकशयनमूर्तिः ८९ | मृन्मय-लिङ्गम् १२०-२२ |
| ४. वैष्णवदशावताराः ९०-९९ | दारुज-लिङ्गम् १२२-२३ |
| १. मत्स्यावतारः ९० | लौहज-लिङ्गम् १२३-२५ |
| २. कूर्मावतारः " | शैलज-लिङ्गम् १२५-२७ |
| ३. वराहः—प्रलययज्ञौ ९०-९२ | रत्नज-लिङ्गम् १२७-२८ |
| ४. नरसिंहः—केवल-स्थौण- | बाण-लिङ्गम् १२९ |
| मानकाः ९२-९४ | अचल-लिङ्ग-भेदेषु मानुषाचललिङ्ग- |
| ५. वामनः ९४ | प्रभेदेषु आढ्यादिलिङ्ग-भेदाः |
| ६. त्रिविक्रमः ९४-९५ | आढ्यादिलिङ्ग-भेदाः १३० |
| ७. जामदग्न्यरामः ९५ | समलिङ्गम् " |
| ८. राघवेरामः ९५-९६ | वर्धमानलिङ्गम् १३०-३१ |
| ९. बलरामः ९७ | शैवाधिक्यलिङ्गम् १३१ |
| १०. कृष्णः—नवनीतनाट-वेणुगोपाल- | स्वस्तिकलिङ्गम् " |
| पार्थसारथि-मदनगोपाल- | धारालिङ्गम् " |
| कालियाहिमर्दकाः ९७-९८ | सहस्रलिङ्गम् १३१-३२ |
| ११. बुद्धः ९८-९९ | त्रैराशिकलिङ्गम् १३२ |
| १२. कल्की ९९ | मुखलिङ्गम् १३२-३३ |
| ५. चतुर्विंशतिमूर्तयः ९९-१०१ | रूपप्रतिमा (लिङ्गोद्भवै) १३३-९९ |
| ६. अन्याः वैष्णवमूर्तयः- | लिङ्गोद्भवम् १३३-३४ |
| अंशवताराः क्षुद्रमूर्तयः १०१-३ | |
| दत्तात्रेय-पुरुष-कपिल-यज्ञनारायण-व्यास- | |
| धन्वन्तरि-हयग्रीव-धर्म-गरुडाः " | |
v2.c82.17
| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| **साधारणासाधारण-सौम्योग्रशान्ता-** | | गजासुरसंहारमूर्तिः | १६७-६८ |
| **शान्तप्रभेदेषु—** | | कालारिमूर्तिः | १६८-७० |
| साधारणी मूर्तिः | १३५ | त्रिपुरान्तकः | १७० |
| असाधारणीषु च— | | **त्रिपुरान्तकमूर्त्यष्टकम्** | **१७०-७३** |
| सदाशिवः | १३६ | शरभेशः | १७३-७४ |
| द्वादशकलासम्पूर्णः सदाशिवः | १३७ | शरभमूर्तिः | १७४ |
| महासदाशिवः | ” | ब्रह्मशिरश्छेत्तृमूर्तिः | १७४ |
| पाशुपतः | ” | **भैरवमूर्तयः** | |
| रौद्रपाशुपतः | ” | स्वच्छन्दभैरवः | १७४-७५ |
| **अन्यास सौम्यास शान्तास च** | | भैरवः | १७५ |
| अर्धनारीश्वरः | १३७-४० | बटुकभैरवः | १७५-७६ |
| गङ्गाधरः | १४०-४१ | स्वर्णार्कषणभैरवः | १७६ |
| कल्याणसुन्दरः | १४१-४५ | **अष्टाष्टभैरवाः—** | |
| वृषवाहनः | १४५-४६ | प्रथमाष्टकम् | १७६ |
| विषापहारः | १४६-४७ | द्वितीयाष्टकम् | ” |
| चन्द्रशेखरः | १४७-४८ | तृतीयाष्टकम् | ” |
| केवलमूर्तिः | १४८ | चतुर्थाष्टकम् | ” |
| सुखासनमूर्तिः | १४८-४९ | पञ्चमाष्टकम् | |
| उमासहितमूर्तिः | १४९ | षष्ठसप्तमाष्टमाष्टकानि | |
| आलिङ्गन-मूर्तिः | ” | अष्टाष्टभैरवनामानि | १७६-७७ |
| उमामहेश्वरः | १५० | **अन्यसंहारमूर्तयः** | |
| सोमास्कन्दः | १५०-५१ | वीरभद्रमूर्तिः | १७७ |
| **अनुग्रहमूर्तिषु—** | | जलन्धरहरमूर्तिः | १७७-७८ |
| विष्ण्वनुग्रहः | १५१-५२ | मल्लारिशिवः | १७८ |
| नन्दीशानुग्रहः | १५२ | अष्टभुजाघोरमूर्तिः | १७८-७९ |
| विघ्नेशानुग्रहः | ” | दशभुजाघोरमूर्तिः | १७९ |
| अर्जुनानुग्रहः | ” | द्वात्रिंशद्भुजाघोरमूर्तिः | ” |
| चण्डेशानुग्रहः | १५२-५३ | **कङ्कालभिक्षाटनमूर्ती** | |
| **नृत्तमूर्तिषु—** | | १ कङ्कालमूर्तिः | १७९-८२ |
| प्रथमामारभ्य नवमीं यावत् | १५३-६२ | २ भिक्षाटनमूर्तिः | १८२-८४ |
| **दक्षिणामूर्तिषु—** | | **एकादश रुद्राः** | १८४ |
| व्याख्यानदक्षिणामूर्तिः | १६२-६४ | (i) १. अजः २. एकपादश्च | ” |
| ज्ञानदक्षिणामूर्तिः | १६४ | ३-११.अहिर्बुध्न-विरूपाक्ष- | |
| योगदक्षिणामूर्तिः | १६४-६६ | रेवत-हर-बहुरूप-त्र्यम्बक- | |
| वीणाधरदक्षिणामूर्तिः | १६६ | सुरेश्वर-जयन्त-अपराजिताश्च | १८५ |
| **अशान्तोघ्रमूर्तयो यथा—** | | (ii) १. सद्योजातः २. वामदेवः | १८६ |
| कामान्तकमूर्तिः | १६६-६७ | ३. अघोरः ४. तत्पुरुषः | ” |
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| विषया: पृष्ठ्ठा: | विषया: पृष्ठ्ठा: |
| ५. ईशान: ६. मृत्युञ्जय: १८६ | भक्तविघ्नेश: २०३ |
| ७. विजय: ८. किरणाक्ष: १८७ | वीरविघ्नेश: ” |
| ९. अघोरास्त्र: १०. श्रीकण्ठ: ” | शक्तिगणेश: ” |
| ११. महादेवश्च ” | ध्वजगणाधिप: ” |
| विद्येश्वरा: | पिङ्गलगणपति: ” |
| (i) स्वरूपम् (ii) नामानि च ” | उच्छिष्टगणपति: ” |
| १. अनन्त: २. त्रिमूर्ति: ” | विघ्नराजगणपति: ” |
| ३. सूक्ष्म: ४. श्रीकण्ठ: १८७ | लक्ष्मीगणेश: २०३-४ |
| ५. शिवोत्तम: ६. शिखण्डी ” | महागregularगणेश: २०४ |
| ७. एकनेत्र: ८. एकरुद्रश्च १८८ | भुवनेशगणेश: ” |
| मूर्त्यष्टकम् | नृत्तगणपति: ” |
| (i) नामानि (ii) स्वरूपवर्णनञ्च १८९ | ऊर्ध्वगणपति: ” |
| तेषु—शर्व—भीम—पशुपति—भवा: ” | प्रसन्नगणेश: ” |
| ईशानादय: पञ्चमूर्तय: | उन्मत्तविनायक: ” |
| १. ईशान: ” | हरिद्रागणेश: ” |
| २. तत्पुरुष: ३. अघोर: १९० | गणेशायतनम् ” |
| ४. वामदेव: ५. सद्योजातश्च ” | गणेशप्रतिहारा: २०५ |
| महेश: महादेवो वा १९०-९१ | ब. सेनापति: कार्त्तिकेय: २०५-२१६ |
| शिवस्य गणादय: १९१-९७ | सेनापति: २०५ |
| नन्दी १९१-९२ | कार्त्तिकेय: २०५-६ |
| चण्डेश: १९२-९४ | सेनानी: २०७ |
| क्षेत्रपाल: १९५-९६ | कुमार: ” |
| आर्य: शास्ता वा १९६-९७ | स्कन्द: २०७-८ |
| शिवभक्ता: १९७ | सामान्यस्कन्द: २०८ |
| शैवलाञ्छनरहस्यम् १९८-९९ | स्कन्दषण्मुख: २०८-९ |
| शिवायतनम् १९९ | पञ्चविध: स्कन्द: २०९-१० |
| शिवायतनेऽष्टप्रतीहारा: ” | विविधबाहुयुक्त:विविधवर्णश्च२१०-१२ |
| **चतुर्थो पटल:** | सुब्रह्मण्य: २१२ |
| गाणपत्यप्रतिमालक्षणम् | शानशक्तिसुब्रह्मण्य: ” |
| अ. गणपति: गणेश: २००-२०५ | अग्निजातसुब्रह्मण्य: ” |
| गणपति: २०० | सौरभेयसुब्रह्मण्य: ” |
| विनायक: २००-२०२ | गाङ्गेयसुब्रह्मण्य: ” |
| बीजगणपति: २०२ | गुहसुब्रह्मण्य: २१३ |
| हेरम्ब: ” | ब्रह्मचारिसुब्रह्मण्य: ” |
| वक्रतुण्ड: ” | देशिकसुब्रह्मण्य: ” |
| बालगणपति: ” | शक्तिधर: ” |
| तरुणगणपति: २०३ | गजवाहन: ” |
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| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| शरवणभवः | २१३ | गौरी | २२९-३० |
| तारकारिः | २१३-१४ | अ. गौरी-द्वादश-मूर्तयः | २३०-३१ |
| ब्रह्मशास्ता | २१४ | ब. गौरी-पञ्च-ललीया-मूर्तयः | २३१ |
| बल्लीकल्याणसुन्दरः | २१४ | स. गौरीमूर्तयः | २३२ |
| बालस्वामी | ” | गौर्यायतनम् | ” |
| क्रौञ्चभेत्ता | ” | गौर्याःअष्टद्वारपालिकाः | ” |
| शिखिबाहः | २१४-१५ | सप्तमातरः | २३२-३९ |
| सुब्रह्मण्यायतनम् | २१५-१६ | सामान्यम् | २३२-३५ |
| सुब्रह्मण्यद्वारपालकौ | २१६ | १. ब्राह्मी | १३५-३६ |
| **पञ्चमो पटलः** | | २. माहेश्वरी | २३६ |
| **देवी-प्रतिमा-लक्षणम्** | २१७-२४४ | ३. वैष्णवी | ” |
| (शाक्तप्रकरणम्) | | ४. कौमारी | २३६-३७ |
| सरस्वति-ध्यानम् | २१७ | ५, वाराही | २३७ |
| सरस्वत्यर्चनम् | २१७-१८ | ६. इन्द्राणी | २३७-३८ |
| सरस्वती | २१८-२० | ७. चामुण्डा | २३८-३९ |
| महालक्ष्मीः | २२०-२१ | वारुणी चामुण्डा | २३९ |
| लक्ष्मीः | २२१-२२ | रक्तचामुण्डा | ” |
| श्रीः | २२२ | **देवीभेदप्रभेदेषु–** | |
| भूमिः | २२२-२३ | नन्दा-भूतमाता-योगनिद्राः | ” |
| तुलसीदेवी | २२३ | वामा-रौद्री-कलविकर्णिका- | |
| महाकाली-ध्यानं लक्षणञ्च | ” | बलविकर्णिकाश्च | ” |
| काली | २२४ | बलप्रमथनी-अम्बा-अम्बिका-मङ्गला | |
| भद्रकाली | ” | सर्वमङ्गला कालरात्रि ललिताः | २४० |
| दुर्गा | २२४-२५ | सर्वभूतदमनी मनोन्मनी च | ” |
| नवदुर्गाः | २२५-२६ | शिवदूती-योगेश्वरी-भैरवी-त्रिपुरभैरवी- | |
| रुद्रांशदुर्गा | २२६ | शिवा-कीर्ति-सिद्धि-ऋद्धयश्च | २४१ |
| वनदुर्गा | ” | क्षमा-दीप्ति-रति-श्वेता-भद्राः | २४२ |
| अग्निदुर्गा | ” | जया-विजया-घण्टाकर्णी- | ” |
| जयदुर्गा | ” | जयन्ती-दिति-अरुन्धती- | ” |
| विन्ध्यवासिनी दुर्गा | ” | अपराजिता-सुरभि-कृष्णाः | ” |
| रिपुमारिणी दुर्गा | ” | इन्द्राक्षी-अन्नपूर्णा-बालाः | २४३ |
| कात्यायनी | २२६-२८ | राजमातङ्गी-अश्वारूढा-भुवनेश्वर्यः | ” |
| कौशिकी | २२८ | ज्येष्ठा | २४३-४४ |
| चण्डिका | २२८-२९ | **षष्ठो पटलः** | |
| चण्डिकाष्टप्रतीहाराः | २२९ | **सौर-प्रतिमा-लक्षणम्** | २४४-२६० |
| | | अ. सूर्यादयः | |
| | | द्वादशादित्याः | २४५-४६ |
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| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| १. सूर्यः | २४६-४८ | सप्तर्षयः | २६६-६७ |
| **आदित्यपरिवाराः नवग्रहाः** | | भक्ताः | २६७ |
| सामा० लक्ष० | २४८-४९ | अर्थ-काम-दिशाः ज्वरश्च | „ |
| २. सोमः | २४९-५० | वेदाः शास्त्राणि च | २६७-६८ |
| ३. भौमः | २५० | धर्मज्ञानवैराग्यादयः | २६८ |
| ४. बुधः | „ | व्योम | २६८-६९ |
| ५.६. देवगुरुशुक्रौ | „ | एडूक | २६९ |
| ७. शनैश्चरः | २५१ | | |
| ८. राहुः | „ | ## अष्टमो पटलः | |
| ९. केतवः | „ | **जैन-प्रतिमा-लक्षणं बौद्ध-प्रतिमा-** | |
| **सौरमायतनम्** | „ | **लक्षणञ्च** | |
| **सौरप्रतीहाराः** | २५१-५३ | **अ. जैनप्रतिमालक्षणम्** | २७०-७६ |
| **ब. दिग्पालाः लोकपालाः वा** | | जिनस्वरूपम् | २७० |
| सामान्यलक्षणम् | २५३-५४ | जिनेश्वराणां सामान्यलाञ्छनानि | „ |
| १. इन्द्रः | २५४-५५ | जैनलक्षणम् | २७०-७१ |
| २. अग्निः | २५५-५६ | अ. २४ तीर्थङ्कराः | २७१ |
| ३. वैवस्वतो यमः | २५६-५७ | ब. २४ शासनदेविकाः | २७१-७३ |
| ४. निर्रृतिः | २५७-५८ | स. २४ शासनदेवाः | २७३-७४ |
| ५. वरुणः | २५८ | षोडशविद्यादेव्यः | २७४-७५ |
| ६. वायुः | २५८-२५९ | क्षेत्रपालः | २७५ |
| ७. धनदः | २५९-६० | मणिभद्रक्षेत्रपालः | „ |
| ८. ईशः | २६० | शान्ती देवी | २७५-७६ |
| ## सप्तमो पटलः | | **जिनायतनम्** | २७६ |
| **मूर्त्यन्तराणि** | | **जिनायतने जिनमूर्तीनां स्थापनक्रमः** | „ |
| **यक्ष-विद्याधर-मुनि-वसु-मरुद्गण-** | | **जिनेन्द्रस्याष्टौ प्रतीहाराः** | „ |
| **पितृगणादीनां प्रतिमा-लक्षणम्** | २६१-६९ | **ब. बौद्धप्रतिमालक्षणम्** | २७७-१९३ |
| अश्विनीदेवते | २६१-६२ | **बुद्धाः बुद्धशक्तयः बोधिसत्त्वाश्च** | |
| यक्षविद्याधराः | २६२ | **पञ्चध्यानिबुद्धाः** | २७७ |
| वसवः नागाश्च | २६२-६४ | १. अमिताभः | „ |
| अप्सरसः असुराश्च | २६४ | २. अक्षोभ्यः | „ |
| पिशाचाः वेतालाश्च | „ | ३. वैरोचनः | „ |
| भूतपिशाचादयः | २६४-६५ | ४. अमोघसिद्धिः | „ |
| मरुद्गणः | ३६५ | ५. रत्नसम्भवः | „ |
| साध्याः | „ | ६. वज्रसत्वोऽपि | „ |
| पितरः | „ | | |
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| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठ |
| दिव्यबुद्धशक्तयः | २७७ | **अक्षोभ्याविर्भावेषु देव्यश्च** | |
| दिव्यबोधिसत्वाः | ” | १-२ महाचीनतारा, जाङ्ग़ुली च | २८६ |
| मानुषबुद्धाः | २७८ | ३. सामान्यविद्युज्जालकरालीप्रभेदाभ्यां चैकजटा | २८७ |
| गौतमो बुद्धः | ” | ४-६. पर्णशवरी-प्रज्ञापारमिता-वज्रचर्चिकाः | ” |
| मानुषबुद्धशक्तयः | ” | ७-८. महामन्त्रानुसारिणी महाप्रत्यङ्गिरा च | २८७-८८ |
| मानुषबोधिसत्वाः | ” | ९-११. ध्वजाग्रकेयूरा-वसुधारा-नैरात्म्याश्च | २८८ |
| **सर्वतन्त्रस्वतन्त्रः मञ्जुश्रीः बोधिसत्वः तस्य चतुर्दशरूपाणि—** | | **वैरोचनाविर्भावेषु देव्य एव** | |
| १-२. वाक्, धर्मधातुवागीश्वरश्च | २७८ | १. अशोककान्तार्यपिचुवाप्रमेदैर्मारीची | ” |
| ३-६. मञ्जुघोष-सिद्धैकवीर-वज्रानङ्ग-नामसङ्गीतयः | २७८-७९ | २-३. उष्णीषविजया-सितातपत्रा-पराजिता च | २८८-८९ |
| ७-१०. वागीश्वर-मञ्जुवर-मञ्जुवज्र-मञ्जुकुमाराः | २७९ | ४.५. महासाहस्रप्रमर्दिनी वज्रवाराही च | २८९ |
| ११-१४. अपरचन-स्थिरचक्र-वादिराट्-मञ्जुनाथाश्च | ” | **अमोघसिद्धाविर्भावेषु देव्य एवं** | |
| **बोधिसत्व अवलोकितेश्वरः— १५ रू०** | | १.४. खदिरव नी-वश्य-षड्भुज-घमदताराः | ” |
| १-'. षडक्षरी-सिंहनाद-खसर्पणाः | २८० | ५-७. पर्णशवरी-महामायूरी, वज्रशृङ्खला च | ” |
| ४-६. लोकनाथ-हालाहल-पद्मनर्तेश्वराः | २८०-८१ | **रत्नसंभवाविर्भावेषु—** | |
| ७-८ हरिहरहिरिवाहनोद्भव-त्रैलोक्यवशङ्करौ | २८१ | देवौ—जम्भालोच्छुष्मजम्भालौ | २९० |
| ९-१०. रक्तलोकेश्वर-मायाजालक्रमौ | ” | देवीषु च-महाप्रतिसरा वसुधारा च | ” |
| ११-१५. नीलकण्ठ-सुगतिसन्दर्शन-प्रेतसन्तर्पित सुखावती-वज्रधर्माः | २८२ | **पञ्चध्यानिबुद्धाविर्भावेषु-** | |
| **अमिताभविभविर्षेषु—देवौ देव्यश्च** | | देवौ—जम्भाल-महाकालौ | २९० |
| महाबलसप्तशतिकहयग्रीवदेवौ | २८२ | देव्यश्च—१-२ वज्रतारा प्रज्ञापारमिता च | २९०-९१ |
| शुक्ला-तारोद्भवा-उड्डियानभेदैः कुरुकुल्ला, भृकुटी, महासितवती च देव्यः | २८२-८३ | ३-४. मायाजालक्रमकुरु़कुल्ला सिततारा च | २९१ |
| **अक्षोभ्याविर्भविषु देवाः** | | **चतुर्ध्यानिबुद्धाविर्भावेषु** | |
| १-२. चण्डरोषणः, द्विभुजः शक्त्यालिङ्गितश्च द्विविधः हेरुकः | २८३ २८४ | वज्रतारैकमात्रम् | ” |
| ३-४. बुद्धकपालः, सम्वर-सप्ताक्षर-महामायाप्रभेदैः वज्रडाकश्च | २८४-८५ | | |
| ५-६. हयग्रीवः रक्त-कृष्ण प्रभेदाभ्यां यमारिश्च | २८५ | | |
| ७. सामान्योच्छूष्मप्रभेदाभ्यां द्विविधो जम्भालः | २८६ | | |
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| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठाः |
| **वज्रसत्वाविर्भावेषु** | | ४-७ वज्रयोगिनी-गृहहमातृका- | |
| १. जम्भालः | २९१ | गणपतिहृदया-वज्रविदारिण्यश्च | २९३ |
| २. चुन्दा च | ” | | |
| **पञ्चरक्षामण्डलीयासु देवतासु–** | | | |
| महाप्रतिसरादयः पञ्च | ” | | |
| **ताराश्च** | | | |
| सामान्याः विशेषाश्च | ” | | |
| **स्वतन्त्रदेवताः** | | | |
| १-३. गणपति-विघ्नान्तक–वज्र-हुङ्कारौ | २९१-९२ | | |
| ४-५. भूतडामर-वज्रज्वालानलाकौ | २९२ | | |
| ६-८. त्रैलोक्यविजय-परमाश्व-नाम-संगीतयः | २९२-९३ | | |
| **स्वतन्त्राः देव्यश्च** | | | |
| १-३. सरस्वती, अपराजिता, वज्र-गान्धारी च | २९३ | | |
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चित्रलक्षणम्
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टि० चित्रलक्षणस्य विषयानुक्रमणी (चित्रप्रशंसा-चित्रोत्पत्ति-चित्रनृत्यगीत-षडङ्ग-चित्र-चित्रप्रकार-चित्रोद्देश-चित्राङ्ग-भूमि-बन्धन-लेप्यकर्म-अण्डकवर्तन-मानादि-अवस्थादि-देवनृपर्षिगन्धर्वेत्यादि-सरित्सागर-वाहन-शैल-शिखर-द्वीप-भूमण्डल-शङ्ख-पद्मादि-चन्द्र-नक्षत्ररात्रिसन्ध्यादिनिर्माण-विलेखा लक्षण-वर्तना-लक्षण-वर्तनाविधा-चित्रलेखनविधि-चित्र-पत्रोत्पत्ति-कण्टक-लक्षण-चित्रकर्मवर्णविन्यास-शुद्धवर्ण-मिश्रवर्ण-स्वर्णप्रयोग-चित्र-गुण-दोषा-दीनां) तत्र २९४ पृष्ठे द्रष्टव्या।
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प्रकाशक
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वास्तु-वाङ्मय-प्रकाशन-शाला
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शुक्ल कुटी
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भारतीय-वास्तु-शास्त्रमधिकृत्य प्रस्तावित-चतुर्दश-ग्रन्थेषु प्रकाशतां नीताः प्रकाशन-यन्त्रालयस्था वाधोलिखिताः ग्रन्थाः–
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| १. | वास्तु-विद्या एवं पुर-निवेश | मू० ८।।) |
| २. | प्रतिमा-विज्ञान | ,, १५) |
| ३. | प्रासाद-वास्तु | प्रेस में |
| ४. | प्रतिमा-लक्षणम् | मू० १२) |
| ५. | चित्र-लक्षणम् | ,, २) |
| 6. | **Hindu Iconography** 700 pages, price Rs. 25/— | in press |
| 7. | **Hindu science of Architecture** with esp. ref. to Bhoja’s Samarāṅgaṇa-Sūtradhāra and Bhuvanadev’s Aparājita-pracchā | Shortly Coming |
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मुद्रकः–
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प्रेम-प्रिंटिंग-प्रेस
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गोलागंज, लखनऊ
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