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Vastu-shastra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c82.21

Vāstu-śāstra (Vol. I: Hindu Science of Architecture; Vol. II: Hindu Canons of Iconography and Painting) v2.c82.21

Language
English

v2.c82.21

| विषयाः | पृष्ठाः | विषयाः | पृष्ठ |
| दिव्यबुद्धशक्तयः | २७७ | **अक्षोभ्याविर्भावेषु देव्यश्च** | |
| दिव्यबोधिसत्वाः | ” | १-२ महाचीनतारा, जाङ्ग़ुली च | २८६ |
| मानुषबुद्धाः | २७८ | ३. सामान्यविद्युज्जालकरालीप्रभेदाभ्यां चैकजटा | २८७ |
| गौतमो बुद्धः | ” | ४-६. पर्णशवरी-प्रज्ञापारमिता-वज्रचर्चिकाः | ” |
| मानुषबुद्धशक्तयः | ” | ७-८. महामन्त्रानुसारिणी महाप्रत्यङ्गिरा च | २८७-८८ |
| मानुषबोधिसत्वाः | ” | ९-११. ध्वजाग्रकेयूरा-वसुधारा-नैरात्म्याश्च | २८८ |
| **सर्वतन्त्रस्वतन्त्रः मञ्जुश्रीः बोधिसत्वः तस्य चतुर्दशरूपाणि—** | | **वैरोचनाविर्भावेषु देव्य एव** | |
| १-२. वाक्, धर्मधातुवागीश्वरश्च | २७८ | १. अशोककान्तार्यपिचुवाप्रमेदैर्मारीची | ” |
| ३-६. मञ्जुघोष-सिद्धैकवीर-वज्रानङ्ग-नामसङ्गीतयः | २७८-७९ | २-३. उष्णीषविजया-सितातपत्रा-पराजिता च | २८८-८९ |
| ७-१०. वागीश्वर-मञ्जुवर-मञ्जुवज्र-मञ्जुकुमाराः | २७९ | ४.५. महासाहस्रप्रमर्दिनी वज्रवाराही च | २८९ |
| ११-१४. अपरचन-स्थिरचक्र-वादिराट्-मञ्जुनाथाश्च | ” | **अमोघसिद्धाविर्भावेषु देव्य एवं** | |
| **बोधिसत्व अवलोकितेश्वरः— १५ रू०** | | १.४. खदिरव नी-वश्य-षड्भुज-घमदताराः | ” |
| १-'. षडक्षरी-सिंहनाद-खसर्पणाः | २८० | ५-७. पर्णशवरी-महामायूरी, वज्रशृङ्खला च | ” |
| ४-६. लोकनाथ-हालाहल-पद्मनर्तेश्वराः | २८०-८१ | **रत्नसंभवाविर्भावेषु—** | |
| ७-८ हरिहरहिरिवाहनोद्भव-त्रैलोक्यवशङ्करौ | २८१ | देवौ—जम्भालोच्छुष्मजम्भालौ | २९० |
| ९-१०. रक्तलोकेश्वर-मायाजालक्रमौ | ” | देवीषु च-महाप्रतिसरा वसुधारा च | ” |
| ११-१५. नीलकण्ठ-सुगतिसन्दर्शन-प्रेतसन्तर्पित सुखावती-वज्रधर्माः | २८२ | **पञ्चध्यानिबुद्धाविर्भावेषु-** | |
| **अमिताभविभविर्षेषु—देवौ देव्यश्च** | | देवौ—जम्भाल-महाकालौ | २९० |
| महाबलसप्तशतिकहयग्रीवदेवौ | २८२ | देव्यश्च—१-२ वज्रतारा प्रज्ञापारमिता च | २९०-९१ |
| शुक्ला-तारोद्भवा-उड्डियानभेदैः कुरुकुल्ला, भृकुटी, महासितवती च देव्यः | २८२-८३ | ३-४. मायाजालक्रमकुरु़कुल्ला सिततारा च | २९१ |
| **अक्षोभ्याविर्भविषु देवाः** | | **चतुर्ध्यानिबुद्धाविर्भावेषु** | |
| १-२. चण्डरोषणः, द्विभुजः शक्त्यालिङ्गितश्च द्विविधः हेरुकः | २८३ २८४ | वज्रतारैकमात्रम् | ” |
| ३-४. बुद्धकपालः, सम्वर-सप्ताक्षर-महामायाप्रभेदैः वज्रडाकश्च | २८४-८५ | | |
| ५-६. हयग्रीवः रक्त-कृष्ण प्रभेदाभ्यां यमारिश्च | २८५ | | |
| ७. सामान्योच्छूष्मप्रभेदाभ्यां द्विविधो जम्भालः | २८६ | | |