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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c24.27

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c24.27

Language
Hindi

c24.27

३ *एं. इं.*; जि. ४, पृष्ठ ५६ के पास के प्लेट से. इस ताम्रलेख में अक्षर रेखारूप में नहीं खुदे हैं किंतु बिंदियों से बनाये हैं. राजपूताने में ई. स. की १४ वीं शताब्दी के बाद के कुछ ताम्रपत्र ऐसे ही बिंदियों से खुदे हुए भी देखने में आये जिनमें से सब से पिछला २० वर्ष पहिले का है. कई तांबे और पीतल के बरतनों पर उनके मालिकों के नाम इसी तरह बिंदियों से खुदे हुए भी देखने आते हैं. ताम्रपत्रादि बहुधा सुनार या लुहार खोदते हैं. उनमें जो अच्छे कारीगर होते हैं वे तो जैसे अक्षर स्याही से लिखे होते हैं वैसे ही खोद लेते हैं परंतु जो अच्छे कारीगर नहीं होते या ग्रामीण होते हैं वे ही बहुधा स्याही से लिखे हुए अक्षरों पर बिंदियां बना देते हैं. यह त्रुटि खोदनेवाले की कारीगरी की ही है.