भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c24.36
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c24.36
- Language
- Hindi
c24.36
५ पंडित भगवानलाल इंद्रजी ने इनको ‘ष्प’ और ‘स्स’ पढ़ा है (इं. एँ; जि. ११, पृ. १२८) परंतु इनको ‘ष्य’ और ‘स्य’ पढ़ना ही ठीक होगा. यह वृत्तांत लिखते समय मेरे पास एक गुप्तलिपि के प्राकृत लेख की छाप आई जिसमें ‘छन्दसेटिस्य’ स्पष्ट है. संस्कृतमिश्रित प्राकृत लेखों में ‘स्स’ के स्थान में ‘स्य’ विभक्ति-प्रत्यय का होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है.