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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c24.44

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c24.44

Language
Hindi

c24.44

यह लिपिपत्र वर्डक से मिले हुए पीतल के पात्र पर खुदे हुए कुशनवंशी राजा हुविष्क के समय के लेख९, कुशनवंशी वाझेष्प के पुत्र कनिष्क के समय के आरा के लेख१० और पाजा११ तथा कलदरा१२ के शिलालेखों से तय्यार किया गया है. वर्डक के पात्रपर का लेख बिंदियों से खुदा है और उसमें कई जगह अक्षरों के नीचे के भाग से दाहिनी ओर ‘र’ सूचक आड़ी लकीर निरर्थक लगी है, जैसे कि भगवद१३ (भगवद्=भगवत्), अग्रभग (अग्रभग=अग्रभाग), नतिग्र ( नतिग=ज्ञांतिक ), भवग्र ( भंवग=भावक ), संभतिग्रन ( संभतिगन ) आदि में. इस लेख में कितने एक अक्षर ऐसे हैं जिनका एक से अधिक तरह पढ़ा जाना संभव है. उनपर एक से अधिक अक्षर लगाये हैं. 'मु' में 'म' का रूप खड़ी लकीर सा बन गया है. कहीं कहीं 'त' और 'र', तथा 'श' और 'श' में स्पष्ट अंतर नहीं है और 'न' तथा 'ण' में भेद नहीं है चाहे सो पढ़ लो.