भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c24.9
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c24.9
- Language
- Hindi
c24.9
यह लिपिपत्र मौर्यवंशी राजा अशोक के शहबाज़गढ़ी और मानसेरा के लेखों२ से तय्यार किया गया है. उक्त लेखों से दिये हुए अक्षरों में सब स्वर ‘अ’ के साथ स्वरों की मात्रा लगा कर ही बनाये हैं और कितने एक अक्षरों की बाईं ओर झुकी हुई खड़ी लकीर के नीचे के अंत को मोड़ कर कुछ ऊपर की ओर बढ़ाया है [देखो, ‘अ’ (तीसरा), ‘ख’ (दूसरा), ‘ग’ (दूसरा), ‘च’ (तीसरा), ‘ढ’ (दूसरा), ‘न’ (चौथा), ‘प’ (दूसरा), ‘फ’ (दूसरा), ‘ब’ (तीसरा), ‘र’ (तीसरा), ‘व’ (दूसरा), और ‘श’ (दूसरा)]. ‘ज’ (दूसरे) की खड़ी लकीर के नीचे एक आड़ी लकीर और जोड़ी है. ‘म’ (चौथे) की बाईं ओर अपूर्ण वृत्त और ‘म’ (पांचवें) के नीचे के भाग में तिरछी लकीर अधिक लगाई है. ‘र’ (दूसरे) की तिरछी खड़ी लकीर के नीचे के अंत से दाहिनी ओर एक आड़ी लकीर३ और लगाई है. यह लकीर संयुक्ताक्षर में दूसरे आनेवाले ‘र’ का चिह्न है परंतु उक्त लेखों में कहीं कहीं यह लकीर बिना आवश्यकता के भी लगी हुई मिलती है और वर्डक से मिले हुए पीतल के पात्र पर के लेख में तो इसकी भरमार पाई जाती है जो उक्त लेखों के लेखकों का शुद्ध लिखना न जानना प्रकट करती है४. इन लेखों में ‘इ’ की मात्रा एक खड़ी या तिरछी