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भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s18: सोने और चांदी की स्याही

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s18

Language
Hindi

सोने और चांदी की स्याही

c30.s18.1

सोने और चांदी के बरकों को गोंद के पानी में घोट कर सुनहरी और रुपहली स्याहियां बनाई जाती हैं. इन स्याहियों से लिखने के पहिले पत्रे सफेद हों तो उन्हें काले या लाल रंग से रंग लेते हैं. फिर कलम से उनपर लिख कर अकीक या कौड़े आदि से घोटते हैं तब अक्षर चमकीले निकल आते हैं. ऐसी स्याहियों का उपयोग विशेष कर चित्रकार लोग चित्रों में करते हैं तो भी श्रीमंत लोग प्राचीन काल से उनका उपयोग पुस्तकादि लिखवाने में कराते थे जिसके उदाहरण मिल आते हैं१.

c30.s18.2

१ अजमेर के सेठ कल्याणमल ढड्ढा के पुस्तकसंग्रह में बहुत सुंदर अक्षरों में लिखा हुआ ‘कल्पसूत्र’ है जिसका पहिला पन्ना सुवर्ण की स्याही से लिखा हुआ है. यह पुस्तक १७ वीं शताब्दी का लिखा हुआ प्रतीत होता है. सुवर्ण की स्याही से पूरे लिखे हुए दो जैन पुस्तकों का सिरोही राज्य के जैनपुस्तकसंग्रहों में होना विश्वस्त रीति से सुना गया है परंतु वे मेरे देखने में नहीं आये. वि. सं. १६२२ के करीब मेरे पिता ने उदयपुर के पंडित सदाशिव से एक छोटा पन्ना सोने की स्याही से और दूसरा चांदी की स्याही से लिखवाया, वे दोनों अब तक विद्यमान हैं और रंगीन कागज़ों पर लिखे हुए हैं. सोने की स्याही से लिखी हुई फारसी की एक किताब अलवर के राज्यपुस्तकालय में है ऐसा सुना जाता है. वैसी ही फारसी की एक किताब सेठ कल्याणमल ढड्ढा के यहां गिरवी रक्खी हुई है परंतु उसपर मुहर लगी हुई होने के कारण उसका नाम मालूम नहीं किया जा सका. सेठ कल्याणमल ढड्ढा के यहाँ कई हस्तलिखित पुस्तकों के संग्रह की देशी छींट के पुट्ठे की एक पुरानी किताब है जिसमें ‘यंत्रावचूरि’ नामक पुस्तक १६ पत्रों (३८ पृष्ठ) पर चांदी की स्याही से बड़े ही सुंदर अक्षरों में लिखा हुआ है, जिसके प्रत्येक पृष्ठ के चारों तरफ के हाशिये रंगीन लकीरों से बनाये गये हैं. हाशियों पर जो इबारत लिखी है वही काली स्याही से है बाकी सब चांदी की स्याही से है. चांदी की स्याही से लिखा हुआ हिस्सा कागज़ को पहिले लाल या काला रंगने के बाद लिखा गया है. पुस्तक में संवत् नहीं है परंतु वह ई. स. की १५ वीं शताब्दी के आसपास का लिखा हुआ प्रतीत होता है. पत्रे इतने जीर्ण हो गये हैं कि हाथ देने से टूटते हैं. दो दो पृष्ठों के बीच रेशम के टुकड़े रक्खे हैं वे भी बिलकुल जीर्णशीर्ण हो गये हैं.

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