भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s18.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s18.1
- Language
- Hindi
c30.s18.1
सोने और चांदी के बरकों को गोंद के पानी में घोट कर सुनहरी और रुपहली स्याहियां बनाई जाती हैं. इन स्याहियों से लिखने के पहिले पत्रे सफेद हों तो उन्हें काले या लाल रंग से रंग लेते हैं. फिर कलम से उनपर लिख कर अकीक या कौड़े आदि से घोटते हैं तब अक्षर चमकीले निकल आते हैं. ऐसी स्याहियों का उपयोग विशेष कर चित्रकार लोग चित्रों में करते हैं तो भी श्रीमंत लोग प्राचीन काल से उनका उपयोग पुस्तकादि लिखवाने में कराते थे जिसके उदाहरण मिल आते हैं१.