भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s5.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s5.1
- Language
- Hindi
c30.s5.1
भारतवर्ष में पत्थर की स्लेटों के प्रचार के पहिले प्राचीन काल से ही विद्यार्थी लोग पाटों पर लिखना सीखते थे. ये पाटे लकड़ी के होते थे और चारों कोनों पर चार पाये उसी लकड़ी में से निकाले हुए होते थे. पाटों पर मुलतानी मिट्टी या खड़िया पोत कर सुखा देते थे. फिर उनपर ईंटों की सुरखी बिछा कर तीखे गोल मुख की लकड़ी की कलम से, जिसको राजपूताने में 'बरतना' या 'बरथा' (वर्णक) कहते हैं, लिखते थे. अब पाटों के स्थान में स्लेटों का प्रचार हो गया है तो भी कितने ही ग्रामीण पाठशालाओं के विद्यार्थी अब तक पाटों पर ही 'पहाड़े', 'हिसाब' आदि लिखते हैं. ज्योतिषी लोग अब तक बहुधा जन्मपत्र और वर्षफल आदि का गणित३ पाटों पर करने के बाद काग़ज़ों पर उतारते हैं. बच्चों की जन्मकुंडलियां तथा विवाह के समय लग्नकुंडलियां प्रथम पाटे पर गुलाल बिछा कर उसपर ही बनाई जाती हैं. फिर वे काग़ज़ पर लिखी जाकर यजमानों को दी जाती हैं.