भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s5.3
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s5.3
- Language
- Hindi
c30.s5.3
लकड़ी की बनी हुई पतली पाटी (फलक) पर भी प्राचीन काल में विद्यार्थी लिखते थे. बौद्धों की जातक कथाओं में विद्यार्थियों के फलक का उल्लेख मिलता है४. अब भी उसपर मुलतानी मिट्टी या खड़िया पोतने बाद स्याही से लिखते हैं. अब तक राजपूताना आदि के बहुत से दुकानदार बिक्री या रोकड़ का हिसाब पहिले ऐसी पाटियों पर लिख लेते हैं, फिर अवकाश के समय उसे बहियों में दर्ज करते हैं. विद्यार्थियों को सुंदर अक्षर लिखना सिखलाने के लिये ऐसी पाटियों को बहुधा एक तरफ़ लाल और दूसरी ओर काली रंगवाते हैं. फिर सुंदर अक्षर लिखनेवाले से उन-पर हरताल से वर्णमाला, बारखड़ी (द्वादशाक्षरी) आदि लिखवा कर उनपर रोगन फिरा देते हैं