भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s16: १६—चालुक्य विक्रम संवत्
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s16
- Language
- Hindi
१६—चालुक्य विक्रम संवत्
c31.s16.1
कल्याणपुर (कल्याणी, निज़ाम राज्य में) के चालुक्य (सोलंकी) राजा विक्रमादित्य (छठे) ने अपने राज्य में शक संवत् को मिटा कर उसके स्थान में अपने नाम का संवत् चलाया. मालवे के प्रसिद्ध विक्रमादित्य के संवत् से भिन्न बतलाने के लिये शिलालेख्वादि में इसका नाम ‘चालुक्य विक्रमकाल’४ या ‘चालुक्य विक्रमवर्ष’५ मिलता है. कभी इसके लिये ‘वीरविक्रमकाल’६, ‘विक्रमकाल’७ और ‘विक्रमवर्ष’८ भी लिखा मिलता है. यह संवत् उक्त राजा के राज्याभिषेक के वर्ष से चला हुआ माना जाता है.
c31.s16.2
४ श्रीमच्चाळुक्यविक्रमकालद १२नेय प्रभवसंवत्सरद० (ज. ए. सो. बंब; जि. १०, पृ. २६०). इस शिलालेख की भाषा कनड़ी है.
c31.s16.3
८ गिरिगवलोचन ३७प्रमितविक्रमवर्षजनन्दनारख्यवत्सर० (की; लि. इं. ख. इं; पृ. ३८, लेखसंख्या २१२).
c31.s16.4
चालुक्य राजा विक्रमादित्य (छठे) के समय के येवूर गांव से मिले हुए शिलालेख में चालुक्य विक्रमवर्ष दूसरा, पिंगल संवत्सर, श्रावण शुक्ला १५ रवि वार चंद्रग्रहण लिखा है९. बार्हस्पत्यमान का पिंगल संवत्सर दक्षिणी गणना के अनुसार शक संवत् ९९९ था अत एव गत शक संवत् और वर्तमान चालुक्य विक्रम संवत् के बीच का अंतर (९९६–२=) ९९७, गत विक्रम संवत् और
c31.s16.5
१ इं. ऍ; जि. १३, पृ. ४१४. नेपाल में पहिले गुप्त संवत् और उसके पीछे हर्ष संवत् चलता था, जिसके बाद नेवार (नेपाल) संवत् चला.
c31.s16.6
२ कशे (शके) १६०७ मार्गशिरवदि अष्टमी मघानक्षत्रे सोमदिने........नेपाल संवत् ८०६ (ह; कॅ. पा; पृ. १६५).
c31.s16.7
५ श्रीमच्चाळुक्यविक्रमवर्षद २नेय पिंगलसंवत्सरद० (इं. ऍ; जि. ८, पृ. २०).
c31.s16.8
६ श्रीवीरविक्रमकाल(ल)नामधेयसंवत्सरेकविंशतिप्रमितेष्वतीतेषु वर्त्तमानधातुसंवत्सरे० (ज. ए. सो. बंब; जि. १०, पृ. १६७).
c31.s16.9
७ श्रीविक्र(क्र)मकालसंवत्सरेषु षट्सु अतीतेषु सप्तमे दुंदुभिसंवत्सरे प्रवर्त्तमाने० (ऍ. इं; जि. ३, पृ. ३०८).
c31.s16.10
९ इं. ऍ. जि. ८, पृ. २० (देखो इसी पृष्ठ का टिप्पण ५).
c31.s16.11
वर्तमान चालुक्य विक्रम संवत् का अंतर ११३२ तथा ई. स. और वर्तमान चालुक्य विक्रम संवत् का अंतर १०७५-७६ आता है अर्थात् वर्तमान चालुक्य विक्रम संवत् में १०७५-७६ मिलाने से ई. स. बनता है.
c31.s16.12
कुर्तकोटि से मिले हुए लेख में चालुक्य विक्रमवर्ष ७ दुंदुभि संवत्सर पौष शुक्ला ३ रवि वार उत्तरायण संक्रांति और व्यतीपात लिखा है१. दक्षिणी बार्हस्पत्य गणना के अनुसार दुंदुभि संवत्सर शक-सं. १००४ था; इससे भी गत शक संवत् और वर्तमान चालुक्य विक्रम संवत् का अंतर (१००४-७ =) ६६७ आता है जैसा कि ऊपर बतलाया गया है.
c31.s16.13
इस संवत् का प्रारंभ चैत्रशुक्ला १ से माना जाता है. यह संवत् अनुमान १०० वर्ष चल कर अस्त हो गया. इसका सब से पिछला लेख चालुक्य विक्रम संवत् ९४२ का मिला है.
c31.s16.14
२ इं. ऍं.; जि. ८, पृ. ६७-८.