भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s26.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s26.1
- Language
- Hindi
c31.s26.1
हिजरी सन् का प्रारंभ मुसल्मान धर्म के प्रवर्तक पैगंबर मुहम्मद साहब के मक्के से भाग कर मदीने को कूच करने के दिन से माना जाता है. अरबी में ‘हिजर’ धातु का अर्थ ‘अलग होना’, ‘छोड़ना’ आदि है इसी लिये इस सन् को हिजरी सन् कहते हैं. प्रारंभ से ही इस सन् का प्रचार नहीं हुआ किंतु मुसल्मान होनेवालों में पहिले पैगंबर के कामों के नामों से वर्ष बतलाये जाते थे जैसे कि पहिले वर्ष को ‘यज़न’ अर्थात् ‘आज्ञा’ ( मक्के से मदीना जाने की ) का वर्ष, दूसरे को हुक्म का वर्ष ( उस वर्ष में मुसल्मान न होनेवालों से लड़ने का हुक्म होना माना जाता है ) आदि. खलीफ़ा उमर ( ई. स. ६३४ से ६४४ तक ) के समय यमन के हाकिम अबूमुसा अशअरी ने खलीफ़ा को अर्ज़ी भेजी कि दरगाह से ( श्रीमान् के यहां से ) शाबान् महीने की लिखी हुई लिखावटें आई हैं परंतु उनसे यह मालूम नहीं होता कि कौनसा ( किस वर्ष का ) शाबान है ? इस पर खलीफ़ा ने कोई सन् नियत करने के लिये विद्वानों की संमति ली और अंत में यह निश्चय हुआ कि पैगंबर के मक्का छोड़ने के समय से (अर्थात् तारीख १५ जुलाई ई. स. ६२२=वि. सं. ६७९ श्रावण शुक्ला २ की शाम से ) इस सन् का प्रारंभ माना जावे२. यह निश्चय हि. स. १७ में होना माना जाता है३.