भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s34.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s34.1
- Language
- Hindi
c31.s34.1
ईसवी सन् ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह (जीसस् क्राइस्ट) के जन्म के वर्ष से१ चला हुआ माना जाता है और ईसा मसीह के नाम से इसको ईसवी सन् कहते हैं. ई. स. की पांचवीं शताब्दी तक तो इस सन् का प्रादुर्भाव भी नहीं हुआ था. ई. स. ५२७ के आसपास रोम नगर (इटली में) के रहनेवाले डायोनिसिअस् एक्सिगुअस् नामक विद्वान् पादरी ने मज़हबी सन् चलाने के विचार से हिसाब लगा कर १६४ वें ओलिंपियड्२ के चौथे वर्ष अर्थात् रोम नगर की स्थापना३ से ७५५ वें वर्ष में ईसा मसीह का जन्म होना स्थिर किया और वहां से लगा कर अपने समय तक के वर्षों की संख्या नियत कर ईसाइयों में इस सन् का प्रचार करने का उद्योग किया. ई. स. की छठी शताब्दी में इटली में, आठवीं में इंग्लैंड में, आठवीं तथा नवीं शताब्दी में फ्रान्स, बेलजियम, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में और ई. स. १००० के आस पास तक यूरोप के समस्त ईसाई देशों में इसका प्रचार हो गया, जहां की काल गणना पहिले भिन्न भिन्न प्रकार से थी. अब तो बहुधा सारे भूमंडल में इसका, कहीं कम कहीं ज्यादा, प्रचार है. सन् के अंकों को छोड़ कर बाकी सब बातों में यह रोमन लोगों का ही वर्ष है. रोमन लोगों का पंचांग पहिले जूलिअस् सीज़र ने स्थिर और ठीक किया था४.