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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s4.1

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s4.1

Language
Hindi

c31.s4.1

बौद्धों में बुद्ध (शाक्यमुनि) के निर्वाण से जो संवत् माना जाता है उसको 'बुद्धनिर्वाण संवत्' कहते हैं. यह बौद्ध ग्रंथों में लिखा मिलता है और कभी कभी शिलालेखों१ में भी. बुद्ध का निर्वाण किस वर्ष में हुआ इसका यथार्थ निर्णय अब तक नहीं हुआ. सीलोन२ (सिंहलद्वीप, लंका), ब्रह्मा और स्याम में बुद्ध का निर्वाण ई. स. से ५४४ वर्ष पूर्व होना माना जाता है और ऐसा ही आसाम के राजगुरु मानते हैं३. चीनवाले ई. स. पूर्व ६३८ में उसका होना मानते हैं४. चीनी यात्री फाहियान ने, जो ई. स. ४०० में यहां आया था, लिखा है कि इस समय तक निर्वाण से १४६७ वर्ष व्यतीत हुए हैं५. इससे बुद्ध के निर्वाण का समय ई. स. पूर्व (१४६७-४००=) १०६७ के आस पास मानना पड़ता है. चीनी यात्री हुएन्त्संग ने निर्वाण से १०० वें वर्ष में राजा अशोक (ई. स. पूर्व २६६ से २२७ तक) का राज्य दूर दूर फैलना बतलाया है६ जिससे निर्वाणकाल ई. स. पूर्व की चौथी शताब्दी के बीच आता है. डॉ. बूलर ने ई. स. पूर्व ४८३-२ और ४७२-१ के बीच७, प्रोफेसर कर्न८ ने ई. स. पूर्व ३८८ में, फग्र्सन९ ने ४८१ में, जनरल कनिंगहाम् ने१० ४७८ में, मैक्समूलर११ ने ४७७ में, पंडित भगवानलाल इंद्रजी ने१२ ६३८ में (गया के लेख के आधार पर), मिस़ डफ़ने१३ ४७७ में, डॉ. बार्नेट ने१४ ४८३ में, डॉ. फ्लीट ने१५ ४८२ में और वी. ए. स्मिथ१६ ने ई. स. पूर्व ४८७ या ४८६ में निर्वाण होना अनुमान किया है. बुद्धनिर्वाण संवत्वाले अधिक लेख न मिलने तथा विद्वानों में इसके प्रारंभ के विषय में मतभेद होने पर भी अभी तो इसका प्रारंभ ई. स. पूर्व ४८७ के आस पास होना स्वीकार करना ठीक जंचता है, परंतु वही निश्चित है ऐसा नहीं कहा जा सकता.