Pracin Bharatiya Veshabhusha c11.s2: कलिंग देश के नाग बुनकर
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c11.s2
- Language
- Hindi
कलिंग देश के नाग बुनकर
c11.s2.1
दक्षिण भारत में इस युग में नाग जाति बहुत सी कलाओं में और विशेषकर बुनाई में पारंगत थी। कलिंग देश के नाग बुनाई में इतने कुशल होते थे कि तामिल भाषा में कलिंग शब्द अच्छे कपड़े का बोधक हो गया । ईसा की प्रारंभिक शताब्दियों में पूर्व समुद्र के किनारे पांड्यों की राज्य-सीमा में भी बहुत अच्छे बुनकर थे और इनकी बनायी हुई मलमल काफी
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परिमाण में निर्यात होती थी । बढ़िया मलमल की तामिल काफी कदर करते थे और बाहरी देशों में भी इसका बड़ा गहरा दाम मिलता था ५ एक प्राचीन तामिल काव्य में अय नाम के एक प्रसिद्ध राजा के नील नाग द्वारा भेंट किया हुआ एक अमूल्य मलमल का थान शिव की मूर्ति पर चढ़ाने का उल्लेख है६ । मूल सर्वास्तिवादियों के विनय में एक जगह स्त्रीरत्न के शरीर के मृदुता की उपमा कलिंग प्रावार से दी गयी है (गिलगिट टेक्स्ट्स्, भा० ३, २, पृ० ३६)
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५ कनकस्सभै, दि तामिल्स एट्टीन हंड्रेड इयर्स एगो, पृ० ४५
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६ शॉफ, दि पेरिप्लस ऑफ दि एरीथ्रियन सी, पृ० ७२-७३, १७६-१८०
Linked texts (2)
- Mahāvastu — Sanskrit
- Divyāvadāna — Sanskrit